More than half Muslim MLAs also moved away from Mamata Banerjee TMC many one by one joined rebel camp डूबती नाव में कौन बैठे? आधे मुस्लिम विधायकों ने भी छोड़ा ममता का साथ, एक-एक कर बागी गुट में गए; करीबी मेयर का इस्तीफा, India News in Hindi - Hindustan
More

डूबती नाव में कौन बैठे? आधे मुस्लिम विधायकों ने भी छोड़ा ममता का साथ, एक-एक कर बागी गुट में गए; करीबी मेयर का इस्तीफा

ठीक एक महीने पहले ममता तृणमूल कांग्रेस का निर्विवाद चेहरा थीं और उनके पास एक मजबूत विधायी शक्ति थी लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों मिली करारी चुनावी हार ने बंगाल में तृणमूल के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रखा दिया है।

Thu, 4 June 2026 07:16 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
share
डूबती नाव में कौन बैठे? आधे मुस्लिम विधायकों ने भी छोड़ा ममता का साथ, एक-एक कर बागी गुट में गए; करीबी मेयर का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चीफ ममता बनर्जी को झटके पर झटका लग रहा है। मुस्लिम विधायकों ने भी उनका साथ छोड़ दिया है और बागी गुट यानी ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हो गए हैं। हालिया चुनावों में TMC ने 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 80 सीटें जीती थीं लेकिन उसके 58 विधायकों ने बुधवार को ममता के फैसले की नाफरमानी करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुना है। बड़ी बात ये है कि इन 58 विधायकों में से 17-18 मुस्लिम विधायक हैं।

बता दें कि पार्टी के 80 में से 34 मुस्लिम विधायक जीते हैं लेकिन उनमे करीब आधे (17-18) विधायक बागी गुट में शामिल हो गए हैं। इनमें मालदा, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जैसे महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक-बहुल जिलों के कद्दावर नेता शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऋतब्रत गुट में शामिल होने वाले विधायकों में कसबा से विधायक और बंगाल के सबसे बड़े मुस्लिम नेताओं में से एक जावेद अहमद खान भी शामिल हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के भीतर लोकतंत्र की कमी की आलोचना की थी।

उनके अलावा, सुजापुर (मालदा) से विधायक और TMC सरकार में पहली महिला मुस्लिम मंत्री सबीना यास्मीन, हरिहरपारा से विधायक और मुर्शिदाबाद में TMC के मुख्य आयोजक/जिला अध्यक्ष नियामत शेख, मुर्शिदाबाद से पार्टी का एक प्रमुख चेहरा इमानी बिस्वास और रघुनाथगंज (मुर्शिदाबाद) से विधायक अखरुज्जमान भी शामिल हैं। अखरुज्जमान ने हाल ही में पार्टी द्वारा अल्पसंख्यक वोटों को संभालने के तौर तरीके में कमियों को खुले तौर पर उजागर किया था।

इस बीत, ममता बनर्जी की करीबी नेता कृष्णा चक्रवर्ती ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बिधाननगर नगर निगम की महापौर पद से इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी की लंबे समय से सहयोगी रहीं चक्रवर्ती ने आज (गुरुवार को) नगर आयुक्त को अपना इस्तीफा सौंपा। चक्रवर्ती ने पत्रकारों से कहा, ''यह पूरी तरह मेरा निजी फैसला है। मैं 16 साल से इस कुर्सी पर हूं। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। मैंने नियमों का पालन करते हुए इस्तीफा दिया है। मैं खुद को कुछ समय देना चाहती हूं। मैं एक पार्षद के रूप में काम करना चाहती हूं।''

नगर निगम के अधिकारियों ने उनका त्यागपत्र मिलने की पुष्टि की। एक अधिकारी ने कहा, ''हमें उनका त्यागपत्र मिल गया है। उन्होंने नगर निकाय मामलों के मंत्री और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी इस्तीफे की प्रति भेजी है।'' इस तरह ममता बनर्जी ने पिछले करीब तीन दशक में जो साख बनाई थी और जो कैडर तैयार किया था, वह भरभराकर गिर चुका है।