ममता बनर्जी को लगने वाला है एक और झटका? अब MPs की बारी; 23 सांसद पका रहे ‘बागी खिचड़ी’
West Bengal TMC Crisis: सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के 23 सांसद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बने विधायकों के बागी गुट के संपर्क में हैं। फिलहाल लोकसभा में TMC के 29 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं।

West Bengal TMC Crisis: पश्चिम बंगाल चुनावों में करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चीफ ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। 80 में से जहां 58 विधायकों ने अलग गुट बना लिया है और उनके आदेशों की नाफरमानी करते हुए विधानसभा में अपना नेता विपक्ष नियुक्त करवा लिया है। वहीं अब TMC में बगावत की यह लहर कोलकाता से नई दिल्ली पहुंचने के संकेत हैं। ताजा खबरों के अनुसार, बंगाल विधानसभा में हुई बगावत की आग अब दिल्ली के गलियारों यानी संसद तक पहुँचती दिख रही है।
सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के आधे से ज्यादा सांसद यानी 23 सांसद अब बागी विधायकों के गुट के संपर्क में हैं, जिससे पार्टी के संसदीय दल में बड़ी टूट का खतरा मंडराने लगा है। बता दें कि लोकसभा में TMC के फिलहाल 29 सांसद हैं, जबकि संसद के उच्च सदन राज्यसभा में 13 सांसद हैं। दल-बदल कानून के मुताबिक, लोकसभा में एक अलग गुट के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 22 सांसदों की जरूरत होगी, जबकि राज्यसभा में अलग गुट के लिए 9 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
वरिष्ठ सांसद बागी गुट का नेतृत्व कर रहे
सूत्रों के हवाले से इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकसभा सांसदों का एक गुट सदन में अलग गुट बनाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब एक दर्जन से ज़्यादा सांसद पहले ही इस कदम के पक्ष में आ चुके थे, जिसकी संख्या हालिया गतिविधियों के बाद बढ़ गई है। खबर है कि एक वरिष्ठ सांसद इस उभरते हुए बागी गुट का नेतृत्व कर रहे हैं, हालांकि माना जा रहा है कि इस पर बातचीत अभी शुरुआती दौर में ही है।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बढ़ता असंतोष
TMC के अंदर इस भारी उथल-पुथल की मुख्य वजह पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बढ़ता असंतोष बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई सांसद उनके नेतृत्व और पार्टी के कामकाज के तरीके से नाखुश हैं और संसद में एक अलग गुट बनाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। इससे साफ है कि TMC के लिए आने वाले दिन काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि विद्रोहियों की नजरें दल-बदल विरोधी कानून की सीमाओं पर टिकी हैं।
ऋतब्रत बनर्जी और सुखेन्दु शेखर राय के संकेत
विधानसभा में बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी, जिनके नेतृत्व में हाल ही में बंगाल विधानसभा में विधायकों के एक बड़े समूह ने बगावत की थी, ने इस पर रहस्य बनाए रखा है। उन्होंने सांसदों के साथ संपर्क की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन यह कहकर सस्पेंस बढ़ा दिया कि, "धैर्य रखें, बहुत कुछ हो सकता है।" वहीं,दूसरी तरफ दिग्गज राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर राय ने खुले तौर पर पार्टी की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, "मैंने इतने कम समय में करीब 60 विधायकों को पार्टी छोड़ते कभी नहीं देखा। ऐसी ही प्रतिक्रिया लोकसभा में भी होने की संभावना है।" बता दें कि राय पिछले कुछ हफ्तों से पार्टी की कार्यप्रणाली के मुखर आलोचक रहे हैं।
'डैमेज कंट्रोल' को आगे आईं ममता बनर्जी
इस बीच, ममता बनर्जी ने 28 साल पुरानी अपनी पार्टी में पहली बार हुई इस तरह की बड़ी टूट को रोकने के लिए अब मोर्चा संभाल लिया है। अब वह खुद से हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के उन विधायकों से संपर्क कर रही हैं, जो बागी गुट की बैठकों में देखे गए थे। पार्टी के भीतर स्थिति अभी भी काफी तनावपूर्ण है क्योंकि बागी खेमे के कुछ विधायक अब भी ममता बनर्जी को केवल एक 'सलाहकार' की भूमिका में देखने के बजाय उन्हें ही सर्वोच्च नेता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं क्योंकि उन्हें दीदी से कोई शिकवा शिकायत नहीं है बल्कि मुख्य शिकायत उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी से है।




साइन इन