फलता में भाजपा की जीत पर भड़कीं ममता, कहा-वोट लूटे गए; ईवीएम पर फूटा गुस्सा
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, फलता में री-पोलिंग के चुनाव परिणाम पर भड़क उठी हैं। ममता ने आरोप लगाया कि इस री-पोलिंग के लिए ईवीएम में गड़बड़ी की गई थी। उन्होंने यह भी कहाकि यहां पर वोट की लूट हुई है।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, फलता में री-पोलिंग के चुनाव परिणाम पर भड़क उठी हैं। ममता ने आरोप लगाया कि इस री-पोलिंग के लिए ईवीएम में गड़बड़ी की गई थी। उन्होंने यह भी कहाकि यहां पर वोट की लूट हुई है। गौरतलब है कि फलता में री-पोलिंग का परिणाम आ चुका है। भाजपा ने यहां एकतरफा जीत हासिल की है। भाजपा के देबांग्शू पांडे ने एक लाख से अधिक वोटों से फलता का मैदान फतह किया है।
ईवीएम से छेड़छाड़ की बात
अपने एक्स हैंडल पर अपलोड एक वीडियो में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने के लिए कई ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने यह भी कहाकि टीएमसी के कार्यकर्ताओं को काउंटिंग सेंटर के बाहर कर दिया गया। ममता ने कहाकि चार मई के चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल और तृणमूल कांग्रेस के लोग आतंक का शिकार हो रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों के लोग मारे गए हैं। कई जगहों पर तालाबंदी हो चुकी है। ममता ने आरोप लगाया कि सभी को इस्तीफा देने पर बाध्य किया जा रहा है।
चार मई जैसे आरोप
ममता बनर्जी के आरोप यहीं खत्म नहीं हुए। उन्होंने कहाकि भाजपा के कार्यकर्ता और सीआपीएफ जवान काउंटिंग सेंटर्स पर घुस गए। 11 बजे के बाद काउंटिंग एजेंट्स को सेंटर्स पर जाने की अनुमति नहीं थी। उनके आईडी कार्ड्स को भी छीन लिया गया था। इससे पहले ममता ने चार मई को भी ऐसे ही आरोप लगाया था। तब उन्होंने कहा था कि उन्हें काउंटिंग सेंटर से बाहर निकाल दिया गया था। इस बीच, ममता के भतीजे अभिषेक ने भी फलता के नतीजे को लेकर निराशा जताई है।
कभी था टीएमसी का गढ़
गौरतलब है कि फलता कभी टीएमसी का गढ़ हुआ करता था। डायमंड हार्बर की तरह यहां पर विपक्षी दलों का जीतना मुश्किल हुआ करता था। लेकिन रविवार को भाजपा ने टीएमसी के इस किले को ध्वस्त कर दिया। इससे पहले 4 मई को आए चुनाव परिणाम में बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत हो चुका है। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर की भी आलोचना की है। एसआईआर के दौरान लाखों वोटों का नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया।
क्या रहा फलता का परिणाम
गौरतलब है कि भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने रविवार को फलता विधानसभा सीट पर 1.09 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे। पुनर्मतदान से कुछ ही दिन पहले खान ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी, जिसे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उनका निजी फैसला बताया था। हालांकि, उस समय नामांकन वापस लेना संभव नहीं था, इसलिए उनका नाम ईवीएम में बना रहा। पांडा को 1,49,666 वोट मिले, जबकि माकपा के शंभू नाथ कुर्मी 40,645 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला 10,084 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
कुल 2.36 लाख मतदाताओं वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में खान को महज 7,783 वोट मिले। टीएमसी का 2011 से लगातार इस सीट पर कब्जा था और 2021 में इसने लगभग 57 प्रतिशत मतों के साथ जीत हासिल की थी। इस जीत के साथ, निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में राज्य विधानसभा में भाजपा की सीटों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है। हालांकि, प्रभावी विधानसभा संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ क्योंकि अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली करके भवानीपुर सीट बरकरार रखी है।




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