महाराष्ट्र कांग्रेस चीफ ने शिवाजी महाराज से की टीपू सुल्तान की तुलना, भाजपा भड़की
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष सकपाल द्वारा टीपू सुल्तान और शिवाजी महाराज के संदर्भ में दिए गए बयान पर वबाल हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सकपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तुलना निंदनीय है और कांग्रेस नेता को खुद पर शर्म आनी चाहिए।

महाराष्ट्र में मैसूर के टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना को लेकर बवाल हो गया है। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की मैसूर के 18वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के "समकक्ष" बताया, जिस पर सत्ताधारी भाजपा भड़क गई है। पुणे में इसे लेकर सपकाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सकपाल को आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा कि यह तुलना निंदनीय है और कांग्रेस नेता को खुद पर शर्म आनी चाहिए।
महाराष्ट्र की राजनीति में टीपू सुल्तान की चर्चा हाल में तब शुरू हो गई थी, जब मालेगांव के डिप्टी मेयर निहाल अहमद ने अपने कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई थी। इस तस्वीर को लेकर शिवसेना पार्षदों और स्थानीय हिंदूवादी संगठनों ने जमकर विरोध किया था। इस पर जब मीडिया सकपाल से उनका जवाब मांगने पहुंची और तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और 'स्वराज' के विचार को पेश करने के उनके तरीके का जिक्र करते हुए टीपू सुल्तान के अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का आह्वान करने का उदाहरण दिया और दावा किया कि यह लड़ाई शिवाजी महाराज के आदर्श की तर्ज पर थी।
सपकाल ने कहा, "इस तरह टीपू सुल्तान एक योद्धा और भारत के भूमिपुत्र के रूप में उभरे। उन्होंने कभी भी जहरीली विचारधाराओं को नहीं अपनाया। हमें टीपू सुल्तान को वीरता के प्रतीक के रूप में शिवाजी महाराज के समकक्ष मानना चाहिए।"
सकपाल के इस बयान के बाद राज्य में राजनैतिक विवाद शुरू हो गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। नागपुर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। सपकाल को छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और उसके सहयोगी दलों को सपकाल की टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।"
विवाद को बढ़ता देख सकपाल ने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी। उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर किए एक पोस्ट में लिखा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता अतुलनीय है, जबकि टीपू सुल्तान भी वीर और स्वराज प्रेमी थे। उन्होंने लिखा, "छत्रपति शिवाजी महाराज को आदर्श मानकर ही टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।"
सकपाल ने भाजपा और हिंदूवादी संगठनों पर निशाना साधते हुए दावा किया कि जब टीपू सुल्तान विदेशी शासकों से लड़ रहे थे, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा पर अमल करने वाले लोग अंग्रेजों के लिए जासूसी और गुलामी कर रहे थे।
उन्होंने कहा, "इसलिए देवेंद्र फडणवीस को इतिहास पढ़ाने का दिखावा नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र के लोग नहीं भूले हैं कि भाजपा-आरएसएस, (पूर्व राज्यपाल) भगतसिंह कोश्यारी और अन्य लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ क्या-क्या बोला और कैसे उनका अपमान किया।" सपकाल ने एक चित्र साझा करते हुए लिखा, "संविधान की मूल प्रति पर शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान दोनों की तस्वीरें हैं।"
आपको बता दें, टीपू सुल्तान इतिहास की एक विवादास्पद हस्ती हैं। जहां एक वर्ग अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनकी वीरता की तारीफ करता है। वहीं, दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हिंदुओं के साथ "दुर्व्यवहार" के लिए उनकी आलोचना करता है। इसके विपरीत, छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी सैन्य प्रतिभा के साथ-साथ परोपकार और सामाजिक कल्याण पर आधारित प्रशासनिक कौशल के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है।




साइन इन