अमेरिका के जागीरदार की तरह काम कर रहा भारत, केंद्र सरकार पर बरसे पिनाराई विजयन
सीएम विजयन ने कहा कि भारत कभी साम्राज्यवाद के खिलाफ मजबूत आवाज रहा है, लेकिन पीवी नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री काल में साम्राज्यवाद की ओर निकटता बढ़ी, जिसमें वैश्वीकरण नीति अपनाना और इजरायल को मान्यता देना शामिल था।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के जागीरदार राज्य की तरह काम कर रहा है। उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत वैश्विक साम्राज्यवाद के खिलाफ मजबूत रुख नहीं अपना रहा है और अमेरिकी नीतियों पर बढ़ती निर्भरता दिखा रहा है। विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने भारत की संप्रभुता को कमजोर किया है, जिससे देश दुनिया के सामने सबसे अधिक अपमानित स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि दोनों दल साम्राज्यवाद के प्रति समान रवैया रखते हैं।
सीएम विजयन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि भारत कभी साम्राज्यवाद के खिलाफ मजबूत आवाज रहा है, लेकिन पीवी नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री काल में साम्राज्यवाद की ओर निकटता बढ़ी, जिसमें वैश्वीकरण नीति अपनाना और इजरायल को मान्यता देना शामिल था। उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते का जिक्र किया, जहां व्यापक विरोध के बावजूद कांग्रेस ने अमेरिका के साथ सहयोग किया। उनके अनुसार, भाजपा सत्ता में आने के बाद कांग्रेस की इन नीतियों को और अधिक तीव्रता से लागू कर रही है, जिससे स्थिति और बदतर हुई है।
तेल खरीद को लेकर सवाल
मुख्यमंत्री ने रूसी कच्चे तेल की खरीद के मुद्दे को प्रमुख उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अब स्थिति ऐसी है कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की इजाजत दी है और नरेंद्र मोदी व भारत सरकार इसे विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर रही है। विजयन ने सवाल उठाया कि अमेरिका को ऐसा अधिकार किसने दिया? भारत एक संप्रभु राष्ट्र है तो तेल कहां से खरीदना है, यह फैसला हमें खुद करना चाहिए, अमेरिका की सहमति की क्या जरूरत है? उन्होंने केंद्र सरकार पर साहस की कमी का आरोप लगाया और कहा कि यह रवैया देश को अपमानित करता है।
पिनाराई विजयन ने निष्कर्ष निकाला कि देश की पिछड़ती स्थिति कांग्रेस के समय से शुरू हुई और भाजपा ने इसे पूरा कर दिया। उन्होंने चिंता जताई कि अगर साम्राज्यवादी स्थितियों की निंदा नहीं की गई, तो देश कहां पहुंच जाएगा। यह बयान केरल विधानसभा चुनाव 2026 के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां राजनीतिक बहस तेज है।




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