Just After taking oath Kerala CM VD Satheesan trap in surname controversy Why Kerala Congress leaders pulling his legs शपथ लेते निशाने पर क्यों आए केरल CM सतीशन, कांग्रेस नेता ही खींच रहे टांग; क्या है नया विवाद?, India News in Hindi - Hindustan
More

शपथ लेते निशाने पर क्यों आए केरल CM सतीशन, कांग्रेस नेता ही खींच रहे टांग; क्या है नया विवाद?

अपनी ही कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना के बीच मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने अपने शपथ में उपनाम लेने के फैसले का बचाव किया और पूछा कि अगर मैं अपने पिता का नाम लेता हूँ, तो इसमें गलत क्या है?

Thu, 21 May 2026 09:48 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, तिरुवनंतपुरम
share
शपथ लेते निशाने पर क्यों आए केरल CM सतीशन, कांग्रेस नेता ही खींच रहे टांग; क्या है नया विवाद?

केरल के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करते ही कांग्रेस नेता वीडी सतीशन एक अनोखे विवाद में घिर गए हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि वह किसी खास नीति या सरकारी फैसले को लेकर विवादों में नहीं घिरे हैं बल्कि अपने ही उपनाम को लेकर अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सतीशन ने 18 मई को केरल के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इसके बाद उन्होंने आज (गुरुवार, 21 मई को) 16वीं केरल विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेते समय अपना पूरा कानूनी नाम 'वडस्सेरी दामोदर मेनन सतीशन' का उच्चारण किया।

यह विवाद मुख्य रूप से सतीशन की पिछली सार्वजनिक राजनीतिक पहचान से बिल्कुल अलग होने के कारण पैदा हुआ है। सतीशन ने 2021 में जब विधायक के तौर पर शपथ ली थी, तो उन्होंने खुद की पहचान सिर्फ 'VD सतीशन' के तौर पर बताई थी लेकिन इस बार, उन्होंने दो बड़े संवैधानिक समारोहों में अपने नाम के पूरे रूप का इस्तेमाल किया और उसमें पारिवारिक 'मेनन' उपनाम को भी जोड़ा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:केरल में भाजपा का ऐतिहासिक कदम, पहली बार लड़ेगी स्पीकर का चुनाव; 3 ही हैं विधायक

उपनाम पर विवाद क्या है?

दरअसल, 'मेनन' उपनाम केरल के उच्च जाति वाले नायर समुदाय से जुड़ा है। उनके आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस जैसी धर्मनिरपेक्ष और समावेशी राजनीति का दावा करने वाली पार्टी के मुख्यमंत्री द्वारा ऐसे जातिसूचक उपनाम को प्रमुखता देना राज्य और समाज को गलत संदेश दे सकता है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत के बाद, कांग्रेस आलाकमान ने सतीशन को इस शीर्ष पद के लिए चुना था। 10 साल बाद पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार से सत्ता छीनकर कांग्रेस ने यह जीत हासिल की थी।

उपनाम का विरोध क्यों?

सतीशन के इस कदम की उनकी पार्टी के नेता आलोचना कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी जाति-सूचक उपनाम को इस तरह से सामने रखना, पार्टी की धर्मनिरपेक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाली छवि के साथ मेल नहीं खाता। PTI के अनुसार, कांग्रेस के कुछ अंदरूनी सूत्रों को यह भी लगा कि इस कदम में एक राजनीतिक "संदेश" छिपा है; खासकर ऐसे समय में, जब BJP और CPM की ओर से कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और जमात-ए-इस्लामी के साथ संबंधों को लेकर लगातार आलोचना की जा रही है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:केरल: 13 नंबर की कार में क्या है, मंत्रियों को किस बात का डर? SC पहुंचा था मामला

कांग्रेस नेता ही खींच रहे टांग

कांग्रेस के कुछ लोगों का मानना ​​है कि 'मेनन' उपनाम का इस्तेमाल करके सतीशन ने हिंदू मतदाताओं के एक खास वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने का संकेत देने की कोशिश की है; ऐसा उस समय किया गया है, जब केरल में पहचान की राजनीति और भी ज़्यादा हावी होती जा रही है। कांग्रेस नेता जिंटो जॉन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस पार्टी को जाति-सूचक उपनामों से दूर रहना चाहिए, तभी वह सही मायने में सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी बन पाएगी। उन्होंने लिखा कि वह अपने पूरे नाम 'थेक्कुमकाटिल जॉन रोमन कैथोलिक जिंटो' के बजाय सिर्फ 'जिंटो जॉन' का इस्तेमाल करेंगे; उन्होंने ऐसा करके उस समुदाय के नाम का इस्तेमाल करने से परहेज़ किया, जिससे वह ताल्लुक रखते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कांग्रेस हारती तो सब गंवा देते सतीशन, वनवास का था ऐलान; पर जीत ने बनाया सुलतान

उन्होंने आगे कहा, “मेरी राजनीति भी मेरे विश्वासों से तय होती है, जो थोड़ी वामपंथी झुकाव वाली कांग्रेसी सोच है।” इसी तरह, कांग्रेस के एक और नेता, VR अनूप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में सुझाव दिया कि CM सतीशन को अंबेडकर को पढ़ने के लिए और समय निकालना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि केरल में जाति अभी भी "सामाजिक पूंजी और सामाजिक शक्ति" के रूप में काम कर रही है।

सतीशन की सफाई

वहीं मुख्यमंत्री सतीशन ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए इसे अपने दिवंगत माता-पिता के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक व्यक्तिगत निर्णय बताया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "अपने पिता का नाम लेने में क्या गलत है? मुझे दुख है कि मैं अपनी मां का नाम नहीं ले सका।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पासपोर्ट में भी यही नाम दर्ज है और इसमें कोई राजनीतिक या जातिगत संदेश नहीं है।

'वंदे मातरम' पर भी बढ़ा विवाद

केरल में सरनेम विवाद के अलावा, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 'वंदे मातरम' के पूर्ण संस्करण के गायन ने भी विवाद खड़ा कर दिया है। सतीशन ने स्पष्ट किया कि सरकार को इसके बारे में पहले से जानकारी नहीं थी और यह निर्देश राजभवन (लोक भवन) से आए थे। उधर, माकपा (CPM) ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' के उन हिस्सों को गाना जिन्हें 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने ही छोड़ दिया था, एक बहुलवादी समाज के लिए अनुचित कदम है। पार्टी ने आरोप लगाया कि ऐसे कदम धर्मनिरपेक्ष माहौल को कमजोर कर सकते हैं।