Kerala 13 number mystery car why even ministers afraid of matter was in Supreme Court केरल की इस 13 नंबर कार में क्या है, मंत्रियों को भी लगता है डर; SC तक पहुंचा था मामला, India News in Hindi - Hindustan
More

केरल की इस 13 नंबर कार में क्या है, मंत्रियों को भी लगता है डर; SC तक पहुंचा था मामला

Kerala में अभी हाल ही में 2016 में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनने के बाद किसी भी मंत्री ने नंबर 13 वाली गाड़ी का इस्तेमाल करने की इच्छा नहीं जताई थी। उस समय BJP ने इस मुद्दे पर लेफ्ट का मजाक भी उड़ाया था।

Thu, 21 May 2026 09:38 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
share
केरल की इस 13 नंबर कार में क्या है, मंत्रियों को भी लगता है डर; SC तक पहुंचा था मामला

Kerala 13 Number Car: कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) गठबंधन ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को चुनाव में मात देकर केरल में नई सरकार बना ली है। मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी हो चुका है, लेकिन सचिवालय के भीतर एक पुराना मुद्दा अभी भी बना हुआ है। इसे समस्या कहें या अंधविश्वास, इसकी चर्चा अक्सर होती रहती है। केरल की नई कैबिनेट में शामिल कोई भी मंत्री सचिवालय में मंत्रियों के लिए मौजूद 13 नंबर वाली कार का इस्तेमाल करने के लिए तैयार नहीं है। यही स्थिति लेफ्ट की सरकार के दौरान भी थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की कैबिनेट में शामिल 20 मंत्रियों में से कोई भी 13 नंबर वाली गाड़ी का इस्तेमाल करने को तैयार नहीं है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी कोई भी मंत्री इसके लिए तैयार नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी उठता है कि आखिर इस कार को सचिवालय में शामिल करके क्यों ही रखा गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब गाड़ियों के अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई तो किसी भी मंत्री ने 1 से 12 नंबर वाली गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई। लेकिन जैसे ही 13 नंबर वाली गाड़ी के इस्तेमाल करनी बात हुई तो कई मंत्रियों ने पहले ही सचिवालय में अपनी आपत्ति दर्ज करा दी। परंपरा का पालन करते हुए 1 नंबर वाली गाड़ी नए मुख्यमंत्री को अलॉट की गई। इसके बाद 2 से 12 नंबर वाली गाड़ियां बाकी 11 मंत्रियों को अलॉट की गईं।

13 नंबर वाली कार के क्या हैं राज?

13 नंबर वाली गाड़ी का इस्तेमाल करने में यह हिचकिचाहट केरल की राजनीति में कोई नई बात नहीं है। केरल सरकार द्वारा जारी किए गए पिछले कई निर्देशों की समीक्षा करने पर पता चलता है कि पहले भी जब-जब 13 नंबर वाली गाड़ी अलॉट करने की कोशिश की गई तब-तब राज्य सचिवालय में इसी तरह की दिक्कतें सामने आईं। असल में पहले इस मुद्दे को सुलझाने के लिए 13 नंबर को पूरी तरह से छोड़कर ही गाड़ियां अलॉट की जाती थीं। पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान भी मंत्रियों ने 13 नंबर वाली गाड़ी का इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे इस नंबर को अशुभ मानते थे।

इस मुद्दे के फिर से सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस पर एक बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने यह सवाल उठाया है कि केरल जैसे प्रगतिशील राज्य में जन प्रतिनिधि अंधविश्वास को क्यों मानेंगे और सिर्फ इसलिए किसी गाड़ी का इस्तेमाल करने से क्यों मना करेंगे, क्योंकि उस पर नंबर 13 लिखा है।

अंधविश्वास से लेफ्ट भी नहीं अछूता

अभी हाल ही में 2016 में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनने के बाद किसी भी मंत्री ने नंबर 13 वाली गाड़ी का इस्तेमाल करने की इच्छा नहीं जताई थी। उस समय BJP ने इस मुद्दे पर लेफ्ट का मजाक भी उड़ाया था। आखिरकार तत्कालीन वित्त मंत्री थॉमस आइजैक, ने उस गाड़ी का इस्तेमाल करने पर सहमति जताई। उससे भी पहले वीएस अच्युतानंदन की सरकार के कार्यकाल के दौरान पूर्व मंत्री एमए बेबी ने अंधविश्वास को गलत साबित करने की कोशिश में अपनी र्जी से नंबर 13 वाली गाड़ी का इस्तेमाल करने पर सहमति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

यह केरल सचिवालय का ही मुद्दा नहीं है। केरल हाईकोर्ट के कमरों को नंबर देते समय भी नंबर 13 को छोड़ दिया गया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके हाईकोर्ट के कमरों को नंबर देने की योजना से नंबर 13 को हटाने के फैसले को चुनौती दी। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि हाईकोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था को इस तरह से अंधविश्वास में लिप्त होते हुए नहीं देखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अंधविश्वास में लिप्त होने के आरोप को सही ठहराया और केरल हाईकोर्ट को फटकार लगाई।