फैमिली कोर्ट में जजों और वकीलों को वर्दी में नहीं आना चाहिए, क्यों बोले CJI सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पारिवारिक अदालतों में जजों और वकीलों को काले रंग का ड्रेस पहनकर नहीं आना याहिए। उन्होंने कहा कि अदालतों को बच्चों के मन से मनोवैज्ञानिक डर को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि पारिवारिक अदालतों के लिए बच्चों के मन से 'मनोवैज्ञानिक डर' को दूर करना बहुत महत्वपूर्ण है और इसके लिए न्यायालयों के पारंपरिक कामकाज में कुछ बदलाव लाने होंगे। उन्होंने सवाल किया, ''क्या पारिवारिक अदालतों में ये काले कपड़े होने चाहिए...क्या यह बच्चे में या बच्चे के मन में मनोवैज्ञानिक भय पैदा नहीं करेगा?'
सीजेआई सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि पारिवारिक अदालतों में पीठासीन जजों और वकीलों को वर्दी में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा, ''मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि हमें किसी विचार को विकसित करने की कोशिश क्यों नहीं करनी चाहिए? आखिर यह सिर्फ एक विचार ही तो है।' सीजेआई ने कहा, ''पारिवारिक अदालतों में उपस्थित आप सभी के लिए, हमारे पीठासीन अधिकारी अदालती पोशाक में नहीं बैठेंगे। वकील भी काले और सफेद वस्त्र पहनकर नहीं आएंगे।'
उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी भी पुलिस की वर्दी में नहीं आएंगे, क्योंकि यह पूरा माहौल बच्चों के मन में भय पैदा करता है, खासकर तब जब वे किसी भी व्यवस्था के सबसे बुरे शिकार होते हैं। रोहिणी में नए परिवार न्यायालय परिसर के आधारशिला समारोह में प्रधान न्यायाधीश ने इन न्यायालयों में सुधार के लिए कई नए विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा, 'इसका उद्देश्य मानवीय संबंधों को सुधारना, उनमें तर्क-वितर्क करना और उन्हें मजबूत करना है। क्या हम इन्हें पारिवारिक समाधान केंद्र नहीं कह सकते?'
सीजेआई की बेंच ने दिल्ली की हरियाली पर क्या कहा
सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह सोच बदलनी होगी कि केवल राष्ट्रीय राजधानी को ही हरियाली की जरूरत है और अन्य राज्यों पर इसका कम असर पड़ता है। अरावली पर्वत श्रृंखला का ही एक विस्तार रिज दिल्ली में स्थित है और यह एक पथरीला, पहाड़ी और वन क्षेत्र है। प्रशासनिक कारणों से इसे चार क्षेत्रों दक्षिण, दक्षिण-मध्य, मध्य और उत्तर में विभाजित किया गया है जो लगभग 7,784 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने टिप्पणी की कि हरित आवरण के मुद्दे पर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। पीठ ने कहा, "हमें यह सोच बदलने की जरूरत है कि राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते केवल दिल्ली को हरियाली की जरूरत है और बाकी शहरों को नहीं।"




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