US अधिकारी के 'चीन जैसी गलती' वाले बयान पर जयशंकर का पलटवार, कहा- भारत तय करेगा…
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति क्या होगी यह भारत की क्षमता ही तय करेगी किसी की गलती नहीं। दरअसल, कुछ समय पहले ही एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि यूएस, भारत के साथ वह गलती नहीं करेगा, जो उसने 20 साल पहले चीन के साथ की थी।

देश की राजधानी दिल्ली में जारी रायसीना डायलॉग्स में उस वक्त हलचल मच गई थी, जब एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि यूएस भारत के साथ वह गलती नहीं दोहराएगा, जो उसने 20 साल पहले चीन के साथ की थी। दरअसल, यहां पर अमेरिकी अधिकारी का मतलब भारत को आर्थिक क्षेत्र में आगे बढ़ने को लेकर था। अब इस बयान को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत का उदय मुख्य रूप से हमारी क्षमताओं के आधार पर होगा।
रायसीना डायलॉग्स में अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका पर तंज कसा। उन्होंने कहा, "भारत का उत्थान कैसे होगा, यह भारत ही तय करेगा। यह हमारी ताकत से तय होगा, न कि दूसरों की गलतियों से।"
अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा?
इससे पहले अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडोयू ने इसी मंच से हाल ही में कहा था कि अमेरिका, भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा। उन्होंने कहा, "हम भारत के साथ वही गलती नहीं करेंगे जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थी, जब हमने कहा था कि हम आपको इन सभी बाजारों में विकसित होने देंगे और फिर अचानक आप हमें व्यापार में पीछे छोड़ने लगे।”उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि वह जो भी समझौता करे, वे अमेरिकी लोगों के लिए निष्पक्ष हों, क्योंकि अमेरिकी सरकार को भी अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है, जैसे भारत सरकार को अपने नागरिकों के प्रति।
दरअसल, यह पूरा मामला हाल में अमेरिका और भारत के बीच हुई डील को लेकर है। इस डील के पहले भारत, अमेरिका के ऊपर ज्यादा टैरिफ लगाता था, जबकि अमेरिका में भारतीय सामान के ऊपर न के बराबर टैरिफ लगाया जाता था। राष्ट्रपति ट्रंप के 'मागा' के बाद अमेरिका ने यह नीति पलट दी है। अब नई व्यापार नीति के तहत अमेरिका भी हम पर टैरिफ लगाता है।
जहां तक बात चीन वाली गलती कि है, तो वह अमेरिका ही था, जिसने चीन को वैश्विक फैक्ट्री बनने में मदद की थी। तमाम कंपनियों को चीन में मैन्यूफैक्चर करने के लिए अमेरिका ने ही अनुमति दी थी। इसकी वजह से आज चीन एक वैश्विक ताकत बनकर उभर रहा है। अमेरिका में भारत के साथ यह प्रक्रिया न दोहराने का विचार काफी समय से चल रहा है, हालांकि यह पहली बार है कि किसी अधिकारी ने भारत की धरती पर खड़े होकर इस तरह की बात की हो।




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