ISRO pslv failure high level probe committee Ajit Doval visit बार-बार क्यों फेल हो रहा इसरो का रॉकेट? 'साजिश' की होगी जांच, डोभाल के दौरे के बाद ऐक्शन, India News in Hindi - Hindustan
More

बार-बार क्यों फेल हो रहा इसरो का रॉकेट? 'साजिश' की होगी जांच, डोभाल के दौरे के बाद ऐक्शन

इसरो के PSLV रॉकेट (C-61 और C-62) की लगातार दो विफलताओं के बाद एक उच्च स्तरीय समिति 'प्रणालीगत' कारणों की जांच कर रही है। एस. सोमनाथ और के. विजयराघवन के नेतृत्व में हो रही इस थर्ड-पार्टी जांच की पूरी खबर पढ़ें।

Tue, 24 Feb 2026 02:16 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
बार-बार क्यों फेल हो रहा इसरो का रॉकेट? 'साजिश' की होगी जांच, डोभाल के दौरे के बाद ऐक्शन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के हालिया मिशनों में आई तकनीकी बाधाओं और विफलता की खबरों ने देश के सुरक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया इसरो दौरे के बाद अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई है। पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ को शामिल करते हुए इस विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी PSLV की लगातार विफलताओं के पीछे के 'प्रणालीगत मुद्दों' और संगठनात्मक समस्याओं की जांच करेगी।

हालिया विफलताएं जिनका होगा विश्लेषण

  1. PSLV-C62 (12 जनवरी, 2026): यह मिशन 16 सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा। रॉकेट का तीसरा चरण प्रज्वलित नहीं हो सका, जिसके कारण यह समुद्र में जा गिरा।
  2. PSLV-C61 (18 मई, 2025): ठीक इसी तरह की समस्या इस मिशन में भी देखी गई थी। इसमें भी तीसरा चरण काम नहीं कर पाया था, जिसके परिणामस्वरूप सरकार की रणनीतिक जरूरतों के लिए बनाया गया EOS-09 सैटेलाइट नष्ट हो गया था।

जांच का दायरा और समिति का उद्देश्य

द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर तकनीकी समितियां यह पता लगाती हैं कि कौन सा पुर्जा खराब हुआ, लेकिन यह नई समिति मैन्युफैक्चरिंग, खरीद और रॉकेट के विभिन्न घटकों को असेंबल करने की प्रक्रियाओं की भी गहराई से जांच करेगी। भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्टम में अब कई निजी कंपनियां भी शामिल हैं। इसलिए, समिति इस बात की भी समीक्षा करेगी कि क्या जवाबदेही तय करने के लिए कोई उचित प्रक्रिया मौजूद है और इसमें कैसे सुधार किया जा सकता है।

समिति के सदस्य (जो इसरो के बाहर के विशेषज्ञ हैं) अप्रैल से पहले वर्तमान इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन को अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अंतरिक्ष आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 3 फरवरी को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा किया था, जो संभवतः PSLV-C62 मिशन की विफलता से ही जुड़ा था।

पुरानी जांच प्रक्रियाओं में बदलाव

रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना: ऐतिहासिक रूप से, इसरो रॉकेट विफलताओं के कारणों की जांच के लिए एक 'विफलता विश्लेषण समिति' (FAC) बनाता है और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करता है। हालांकि, PSLV-C61 और PSLV-C62 दोनों मामलों में यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

PMO को रिपोर्ट: 18 मई (PSLV-C61) की दुर्घटना की FAC रिपोर्ट PSLV-C62 के प्रक्षेपण से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन इसके विवरण गुप्त रखे गए हैं।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि इसरो के भीतर विश्लेषण करने की पूरी विशेषज्ञता है, लेकिन इस बार जनता और स्टेकहोल्डर्स का विश्वास बनाए रखने के लिए तीसरे पक्ष का मूल्यांकन किया जा रहा है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:खास तकनीक पर काम कर रहा इसरो, नारायणन ने बताया मकसद; कैसा रहेगा भविष्य
ये भी पढ़ें:लगातार दूसरी बार फेल हुआ इसरो का भरोसेमंद रॉकेट, 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में गुम
ये भी पढ़ें:इसरो मिशन को झटका; ऑर्बिट में तैनात नहीं हो पाया अन्वेषा, दिशा भटका रॉकेट

अगला लक्ष्य: इसरो समस्या को पूरी तरह से ठीक करने के बाद जून में अपने अगले प्रक्षेपण की महत्वाकांक्षी योजना बना रहा है।

आगामी मिशन: इस वर्ष 18 प्रक्षेपण निर्धारित हैं, जिनमें से 6 में निजी क्षेत्र के सैटेलाइट शामिल हैं।

विदेशी लॉन्च: अगले साल जापान, अमेरिका और फ्रांस के 3 बड़े विदेशी सैटेलाइट भी लॉन्च होने हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी देश या कंपनी ने अपने प्रक्षेपण अनुरोध को वापस नहीं लिया है, जो दर्शाता है कि दुनिया भर में इसरो की विश्वसनीयता और उस पर भरोसा अभी भी पूरी तरह से बरकरार है। गौरतलब है कि 1993 से PSLV की सफलता दर 90% से अधिक रही है और इसने लगभग 350 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उनकी कक्षाओं में स्थापित किया है।