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बड़ा झटका! लगातार दूसरी बार फेल हुआ इसरो का भरोसेमंद रॉकेट, 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में गुम

लगातार आठ महीनों में यह PSLV की दूसरी दुर्लभ विफलता है। इससे पहले PSLV ने 63 प्रक्षेपणों में लगभग 94 प्रतिशत सफलता दर के साथ चंद्रयान-1 और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों को कक्षा तक पहुंचाया है।

Mon, 12 Jan 2026 12:49 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बड़ा झटका! लगातार दूसरी बार फेल हुआ इसरो का भरोसेमंद रॉकेट, 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में गुम

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एजेंसियों में शुमार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को साल 2026 के अपने पहले ही मिशन में बड़ा झटका लगा है। इसरो का भरोसेमंद रॉकेट PSLV-C62 अपनी मंजिल तक पहुंचने में नाकाम रहा। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से एक शानदार और 'गरजदार' लॉन्च के बावजूद, रॉकेट तीसरी स्टेज में नियंत्रण खो बैठा, जिससे देश का अहम जासूसी सैटेलाइट 'अन्वेषा' (EOS-N1) और 15 अन्य छोटे सैटेलाइट अंतरिक्ष में कहीं गुम हो गए।

शानदार शुरुआत, लेकिन तीसरे चरण में संकट

260 टन वजनी PSLV-DL संस्करण ने सुबह 10:17 बजे IST पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल उड़ान भरी। पहले और दूसरे चरण का प्रदर्शन पूरी तरह सामान्य रहा और सॉलिड बूस्टर आइसोलेशन भी निर्बाध तरीके से हुआ। देशभर में लोग लाइव प्रसारण के जरिए इस प्रक्षेपण को देख रहे थे।

हालांकि, तीसरे चरण के इग्निशन के बाद मिशन कंट्रोल रूम में अचानक सन्नाटा छा गया। टेलीमेट्री डेटा का आना बंद हो गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि रॉकेट तय 505 किमी सूर्य-समकालिक कक्षा तक नहीं पहुंच सका।

ISRO प्रमुख का बयान

ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने घटना के बाद कहा- रॉकेट का प्रदर्शन तीसरे चरण के अंत तक सामान्य था, लेकिन उसके बाद रोल रेट्स में गड़बड़ी देखी गई और रॉकेट अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया। हम डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं, लेकिन अभी के लिए मिशन पूरा नहीं हो सका है। जल्द ही विस्तृत जानकारी साझा करेंगे।

क्या था मिशन का उद्देश्य? देश का 'जासूसी नेत्र' हुआ नष्ट

इस मिशन की सबसे बड़ी क्षति EOS-N1 (अन्वेषा) का खोना है। यह DRDO के लिए बनाया गया एक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट था, जो सीमाओं की निगरानी और दुश्मन के ठिकानों को पहचानने में बेहद सक्षम था। यह समुद्री निगरानी के लिए डिजाइन किया गया था। इसके अलावा, इस मिशन में भारत और विदेशों के स्टार्टअप्स द्वारा बनाए गए 15 अन्य छोटे सैटेलाइट भी शामिल थे, जो अब मलबे में तब्दील हो चुके हैं। इनमें भारतीय छात्रों द्वारा विकसित प्रयोगात्मक सैटेलाइट, निजी कंपनियों के तकनीकी परीक्षण और स्पेन का KID री-एंट्री डिमॉन्स्ट्रेटर शामिल था।

लगातार दूसरी नाकामी से सवाल खड़े

यह विफलता अगस्त 2025 में हुए PSLV-C61 मिशन की याद दिलाती है, जिसमें तीसरे चरण के चैंबर प्रेशर में गिरावट के कारण EOS-09 सैटेलाइट खो गया था। C62 में भी लगभग आठ मिनट बाद मिशन की प्रगति रुक गई, जिससे ठोस ईंधन वाले तीसरे चरण की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ISRO ने पुष्टि की है कि रॉकेट अपने तय उड़ान पथ से भटक गया था और अब इस मामले की जांच के लिए विफलता विश्लेषण समिति गठित की जाएगी।

लगातार आठ महीनों में यह PSLV की दूसरी दुर्लभ विफलता है। इससे पहले PSLV ने 63 प्रक्षेपणों में लगभग 94 प्रतिशत सफलता दर के साथ चंद्रयान-1 और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों को कक्षा तक पहुंचाया है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र पर प्रभाव

PSLV के जरिए NSIL द्वारा किए जा रहे कॉमर्शियल राइडशेयर मिशनों की साख को भी झटका लगा है। इससे भारत के उभरते निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। यह दोहरी विफलता ISRO की 2026 की महत्वाकांक्षी योजनाओं- 100 से अधिक सैटेलाइट्स के प्रक्षेपण, NavIC विस्तार और गगनयान मानव मिशन की तैयारियों पर असर डाल सकती है।

हालांकि PSLV की मॉड्यूलर डिजाइन के चलते सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। ISRO नेतृत्व ने भरोसा दिलाया है कि आवश्यक तकनीकी सुधारों के बाद कार्यक्रम को पटरी पर लाया जाएगा, जरूरत पड़ने पर LVM3 जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।