Is Mamata Banerjee TMC Beginning to Crumble After the Bengal Defeat 16 Leaders Resign बंगाल हार के बाद टूटने लगी ममता बनर्जी की TMC? एक साथ 16 नेताओं का इस्तीफा, India News in Hindi - Hindustan
More

बंगाल हार के बाद टूटने लगी ममता बनर्जी की TMC? एक साथ 16 नेताओं का इस्तीफा

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल विधायकों के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में कम उपस्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद विपक्षी दल की भूमिका में खुद को कितनी प्रभावी ढंग से ढाल पाती है।

Fri, 22 May 2026 01:40 PMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
share
बंगाल हार के बाद टूटने लगी ममता बनर्जी की TMC? एक साथ 16 नेताओं का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ने के आसार हैं। खबर है कि हलिशहर नगरपालिका में एक सात 16 टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफा सौंप दिया है। कहा जा रहा है कि राज्य के चुनाव में हार के बाद पार्टी का स्थानीय नेतृत्व दूर हो गया है। इसके साथ ही टीएमसी में आंतरिक कलह को लेकर अटकलों का दौर फिर शुरू हो गया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर नेतृत्व से असंतोष के बाद पार्षदों ने यह फैसला लिया है। कथित तौर पर पार्षदों के आरोप हैं कि सांसद पार्थ भौमिक समेत क्षेत्र के कई बड़े नेताओं ने चुनाव में हार के बाद से उनसे संपर्क नहीं किया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ममता ने एक और गढ़ गंवाया; जहां चलता था भतीजे का सिक्का,वहां TMC के झंडे नहीं बचे

अन्य जगहों पर भी ऐसे ही हाल

रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी स्थिति कंचरपारा नगर पालिका क्षेत्र में बन रही है। हलिशहर नगरपालिका में इस्तीफा देने वालों में 5 महिलाएं भी शामिल हैं। हालांकि, अध्यक्ष शुभांकर घोष इस प्रक्रिया से दूर रहे हैं। बीजापुर विधायक सुदीप्ता दास ने इस्तीफा देने वालों की सूची जारी की है। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिया है कि इसके चलते जनता के कामों में परेशानी नहीं आएगी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:शुभेंदु ने पूरा किया अमित शाह का वादा, कई बूथों पर 50 वोट भी नहीं जुटा पाईं ममता

विरोध प्रदर्शन में नहीं पहुंचे विधायक

तृणमूल कांग्रेस के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन से पार्टी के कई विधायकों की अनुपस्थिति ने बुधवार को राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। यह घटनाक्रम पार्टी के आंतरिक विचार-विमर्श के एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर जनता से जुड़ने के लिए सड़क पर उतरने की राजनीति की ओर लौटने की जरूरत पर चर्चा हुई थी।

80 विधायकों में से केवल 35 ही कार्यक्रम में पहुंचे थे, जिससे राजनीतिक गलियारों में संगठन के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हो गईं। यह ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी चुनावी हार के बाद खुद को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के नेता पद के लिए पार्टी की पसंद माने जा रहे शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि कई विधायक संगठनात्मक जिम्मेदारियों और अन्य व्यावहारिक कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जहांगीर चुनाव में नहीं, पर EVM पर रहेगा नाम; गढ़ में ममता के पास उम्मीदवार नहीं

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल विधायकों के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में कम उपस्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद विपक्षी दल की भूमिका में खुद को कितनी प्रभावी ढंग से ढाल पाती है।