क्या भारत से भी होर्मुज पर 20 लाख डॉलर टैक्स वसूलेगा ईरान, सरकार ने दिया जवाब
तेहरान ने मंगलवार को संकेत दिए हैं कि स्थायी शांति समझौते के तहत वह स्ट्रेट से जहाज निकालने के लिए फीस की मांग कर सकता है। अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि यह फीस 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट हो सकती है। ईरान और ओमान होर्मुज में जहाजरानी शुल्क वसूलेंगे।

अमेरिका के साथ सीजफायर के बाद अब ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों से फीस लेने की तैयारी कर रहा है। खबरें हैं कि मंगलवार को ही ईरान की संसद में टोल को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। कहा जा रहा है कि यह फीस 20 लाख डॉलर तक हो सकती है। सवाल है कि क्या पहले भारत को अपना दोस्त करार दे चुका ईरान अब टोल वसूलने वाला है। बहरहाल, ताजा स्थिति पर सरकार की तरफ से भी आधिकारिक बयान आ गया है।
गुरुवार को हुई एक प्रेस वार्ता में सरकार ने साफ कर दिया है कि टोल टैक्स को लेकर ईरान से कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने टोल से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया कि कई मौकों पर यह सवाल पूछा जाता रहा है, लेकिन 'इस संबंध में ईरान और भारत के बीच कोई भी बातचीत नहीं हुई है।' हाल ही में एक और भारतीय अधिकारी ने कहा था कि टोल के बारे में जानकारी नहीं है।
शुक्रवार से खुल रहा है
बुधवार को एक ईरानी अधिकारी ने बताया था कि सीमित रूप से शुक्रवार को होर्मुज शुरू हो सकता है। यह पूरी प्रक्रिया ईरान के नियंत्रण में होगी। खास बात है कि दुनिया के तेल आवागमन के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज करीब 6 सप्ताह तक युद्ध के चलते बंद रहा था। हालांकि, ईरान ने कुछ मित्र देशों को निकलने की अनुमति दी थी, जिनमें भारत का नाम भी था।
20 लाख डॉलर वसूल सकता है
तेहरान ने मंगलवार को संकेत दिए हैं कि स्थायी शांति समझौते के तहत वह स्ट्रेट से जहाज निकालने के लिए फीस की मांग कर सकता है। अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि यह फीस 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट हो सकती है। खास बात है कि साल 2025 में मिडिल ईस्ट से ईरान तक कच्चे तेल का जहाज ले जाने में करीब इतना ही खर्च आता था।
ईरान और ओमान दोनों वसूलेंगे फीस
एपी के अनुसार, ईरान और ओमान होर्मुज में जहाजरानी शुल्क वसूलेंगे। युद्ध-विराम से इस मार्ग पर नियंत्रण को औपचारिक रूप दिया जा सकता है और ईरान को राजस्व का एक नया स्रोत मिल सकता है। एक अधिकारी के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान और ओमान दोनों को स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति दी गई है। अधिकारी ने कहा कि ईरान इस राशि का इस्तेमाल पुनर्निर्माण के लिए करेगा।
भारत को दी थी निकलने की अनुमति
युद्ध के बीच ही ईरान ने कुछ देशों के जहाजों को दोस्त करार दिया था और जहाज निकलने की अनुमति दे दी थी। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस लिस्ट में भारत, पाकिस्तान समेत कुछ देशों का नाम लिया था। हाल ही में भारत का ग्रीन आशा एलपीजी लेकर भारत पहुंचा है। इससे पहले भी शिवालिक, नंदा देवी समेत कई जहाज भारत पहुंच चुके हैं।




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