शहबाज शरीफ के एक पोस्ट से खुली पाकिस्तान की पोल, ईरान-US सीजफायर की अलग ही कहानी
लेबनान को लेकर भी पाकिस्तान का झूठ सामने आया है। शरीफ ने कहा था कि संघर्ष विराम में लेबनान भी शामिल है, लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को इससे साफ इनकार कर दिया।

Iran-America Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम कराने की वाहवाही ले रहे पाकिस्तान की असलियत सामने आ गई है। खबर है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर फैसला हो रहा था, ठीक उसी समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ एक्स पर अमेरिका से ईरान को दी गई चेतावनी की डेडलाइन दो सप्ताह बढ़ाने का अनुरोध कर रहे थे।
अमेरिकी मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया पर सक्रियता से ज्यादा अमेरिका के कूटनीतिक चैनल सक्रिय थे। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान के लिए मंगलवार शाम की डेडलाइन बढ़ाने के लिए एक पब्लिक अपील पोस्ट की।
ट्रंप की ईरान के लिए रात आठ बजे की डेडलाइन तेजी से पास आ रही थी और पाकिस्तान दोनों पक्षों के लिए एक रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा था। इसलिए प्रधानमंत्री शरीफ ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। वे ट्रंप से अनुरोध कर रहे थे कि डेडलाइन दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें। फिर उन्होंने ट्रंप और दूसरे टॉप सलाहकारों को टैग किया, लेकिन पर्दे के पीछे वाइट हाउस ने शरीफ के पोस्ट से पहले ही ईरान के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए थे।
लेबनान को लेकर भी पाकिस्तान का झूठ सामने आया है। शरीफ ने कहा था कि संघर्ष विराम में लेबनान भी शामिल है, लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को इससे साफ इनकार कर दिया।
वाइट हाउस ने युद्धविराम कराने को दबाव डाला
वाइट हाउस ने पाकिस्तान पर ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम करवाने का दबाव डाला था। एक अखबार की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच खुद को एक शांतिदूत के तौर पर पेश करने की कोशिश की थी। यह रिपोर्ट पाक के स्वतंत्र कूटनीतिक रुख पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि इससे पता चलता है कि इस्लामाबाद तटस्थ मध्यस्थ नहीं था, बल्कि अमेरिका के लिए अस्थायी युद्धविराम डील को आगे बढ़ाने का जरिया मात्र था।
बातचीत से जुड़े लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने पाक पर दबाव डाला कि वह वॉशिंगटन का प्रस्ताव ईरान के सामने रखे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज ने सबसे पहले सार्वजनिक तौर पर दो हफ्ते के सीजफायर का प्रस्ताव रखा था। सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने केंद्रीय भूमिका निभाई और अमेरिकी अफसरों के साथ चर्चा की।
वार्ता की मेजबानी करेगा पाकिस्तान
पाकिस्तान शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता की मेजबानी करने वाला है, जिसका उद्देश्य युद्धविराम को मजबूत करना और तनाव को बढ़ने से रोकना है।
अमेरिका और ईरान बुधवार को दो हफ्ते के लिए एक सशर्त युद्धविराम पर सहमत हो गए। इसके बाद मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्धविराम को एक स्थायी शांति में तब्दील करने के लिए इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बैठक होनी है। दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल गुरुवार रात इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद है। पाक में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघादम ने तेहरान के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी की पुष्टि की है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन