Iranian crude reach India after seven years as tankers Felicity Jaya dock Indian ports होर्मुज संकट के बीच तेहरान से आई खुशखबरी, 7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी कच्चा तेल, India News in Hindi - Hindustan
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होर्मुज संकट के बीच तेहरान से आई खुशखबरी, 7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी कच्चा तेल

करीब सात साल बाद भारत पहुंचे ये ईरानी तेल के पहले कार्गो हैं। इससे पहले अमेरिका ने पिछले महीने कुछ शर्तों के साथ ईरान तेल की खरीद पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत दी थी।

Mon, 13 April 2026 01:11 PMJagriti Kumari पीटीआई, नई दिल्ली
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होर्मुज संकट के बीच तेहरान से आई खुशखबरी, 7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी कच्चा तेल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही तनातनी के बीच ईरान से भारत के लिए बड़ी राहत आई है। करीब सात साल के बाद ईरान का कच्चा तेल फिर से भारत पहुंचा है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, दो बड़े सुपरटैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तट पर पहुंचे हैं, जो ईरानी कच्चा तेल लेकर आए हैं।

जानकारी के मुताबिक ‘फेलिसिटी’ नाम का एक बहुत बड़ा क्रूड कैरियर, जिसे नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी ऑपरेट करती है, रविवार देर रात गुजरात के सिका तट के पास पहुंचा। इस टैंकर में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जिसे मार्च के बीच में खार्ग द्वीप से लोड किया गया था। वहीं दूसरा टैंकर ‘जया’ ओडिशा के पारादीप तट के पास पहुंचा है। उसमें भी लगभग इतनी ही मात्रा में कच्चा तेल है। इसे फरवरी के आखिर में खार्ग द्वीप से लोड किया गया था।

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किसने खरीदी नई खेप?

भारत पहुंचे इन कार्गो के खरीदारों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पारादीप पोर्ट मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन चलाती है, जिसने पुष्टि की है कि उसने छूट के तहत कम से कम एक खेप खरीदी है। वहीं सिका क्षेत्र रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के लिए एक अहम क्रूड हैंडलिंग हब है, जहां इन कंपनियों का इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।

सात साल पहुंचा ईरानी तेल

बता दें कि करीब सात साल बाद भारत पहुंचे ये ईरानी तेल के पहले कार्गो हैं। इससे पहले अमेरिका ने पिछले महीने कुछ शर्तों के साथ प्रतिबंधों में राहत दी थी। एक महीने की इस छूट के तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल को बेचने की इजाजत दी गई थी, ताकि वैश्विक ईंधन सप्लाई में कमी ना आए और कीमतें काबू में रहें। हालांकि, बीते शनिवार को पाकिस्तान में शांति वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है, जिससे ईरान को तेल निर्यात से हो रही आय को सीमित किया जा सके।

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ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता था भारत

गौरतलब है कि इससे पहले भारत ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदता था। रिफाइनरी के लिए अनुकूल होने के कारण ईरानी ‘लाइट’ और ‘हेवी’ ग्रेड की काफी मांग थी। 2018 में भारत ने रोजाना करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा था, जो जनवरी से मई 2019 के बीच घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था। इसके बाद मई 2019 से आयात पूरी तरह बंद हो गया था। उस समय भारत के कुल तेल आयात में ईरानी तेल की हिस्सेदारी 11.5 प्रतिशत तक थी।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा तनाव

इस भी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव फिर से बढ़ गया है। अमेरिकी सेना सोमवार से भारतीय समयानुसार सोमवार रात 8:30 बजे ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर देगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने घोषणा की है कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के अनुरूप उठाया जा रहा है। यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से प्रस्थान करने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू की जाएगी। इसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं।