स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए लड़ने वाला अमेरिका, खुद क्यों बंद करने पर उतारू
2 मार्च को, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने कहा, 'होर्मुज बंद है। अगर कोई भी इससे गुजरने की कोशिश करेगा, तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देंगे।
ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग में परमाणु के बाद शायद सबसे ज्यादा इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज शब्द का ही हुआ है। 4 मार्च के बाद इस शब्द से भारत समेत दुनिया का लगभग हर व्यक्ति परिचित हो गया होगा। वजह थी कि इस तारीख से ही ईरानी बलों ने इसे बंद करने की घोषणा कर दी थी और 23 मार्च आते-आते इसे पूरी तरह बंद करने की धमकी तक दे डाली थी। यह अहम जलमार्ग बंद हुआ भी, लेकिन फिर खोल दिया गया। दिलचस्प है कि अब इसपर फिर नाकाबंदी की जा रही है। इस बार अमेरिका ने यहां ब्लॉक लगाने का काम किया है। विस्तार से समझते हैं कि परमाणु से शुरू हुआ युद्ध कैसे होर्मुज खुलवाने और बंद कराने की होड़ की ओर मुड़ गया था।
पहले समझें क्यों जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
ईरान और ओमान की सीमा पर बना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम जलमार्गों में से एक है। इसके जरिए दुनिया के बाजारों तक तेल, प्राकृतिक गैस, हीलियम, खाद और अन्य औद्योगिक उत्पाद समेत कई चीजें पहुंचती हैं। दुनिया के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के समुद्री व्यापार का लगभग 27% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसके अलावा, दुनिया के 20% LNG का व्यापार भी इसी जलमार्ग से होता है।
यह स्ट्रेट एक संकरा समुद्री रास्ता है जो ओमान की खाड़ी और अरब सागर से फारस की खाड़ी में जाने का गेट बनाता है। अपने सबसे संकरे बिंदु पर, इसकी चौड़ाई 22 समुद्री मील है और यह ईरान और ओमान की समुद्री सीमा के भीतर आता है। इस रास्ते से जहाजों के आने-जाने के लिए दो लेन बनी हुई हैं, एक आने के लिए और एक जाने के लिए। हर लेन दो मील चौड़ी है और उनके बीच दो मील का खाली हिस्सा छोड़ा गया है।
क्यों कर दिया था बंद
2 मार्च को, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने कहा, 'होर्मुज बंद है। अगर कोई भी इससे गुजरने की कोशिश करेगा, तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देंगे। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का हवाला देकर स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दे दी थी।
खुलवाने की कोशिशें
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोकस स्ट्रेट खुलवाने की ओर जाता नजर आया। यहां तक कि उन्होंने NATO और चीन तक से मदद मांग ली थी। हालांकि, शुरुआती दौर में उन्हें किसी भी मुल्क का साथ नहीं मिला। उन्होंने यह तक कह दिया था कि अमेरिका बहुत कम तेल इस रास्ते से मंगवाता है और अन्य देशों पर इसे खुलवाने की जिम्मेदारी डाल दी थी। इसके बाद मार्च में ही अमेरिका ने स्ट्रेट खुलवाने के लिए सैन्य अभियान की शुरुआत भी की थी।
कैसे खुला और टोल तक पहुंच गई बात
ट्रंप ने बुधवार को ऐलान किया था कि ईरान के साथ 2 सप्ताह के सीजफायर पर सहमति बन गई है। साथ ही कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी खुल जाएगा। अब मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाने लगा कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल लेने की तैयारी कर रहा है। खास बात है कि यह जलमार्ग पहले फ्री था। ईरान और ओमान इस पर टोल वसूलेंगे। इतना ही नहीं यह भी कहा जाने लगा कि ईरान की संसद में इसपर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, ट्रंप ने साफ कर दिया था कि शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए।
फिर बंद होने की तैयारी
बाद में खबरें आईं की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की बैठक होगी। बैठक हुई भी, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कई बड़े नेता पहुंचे थे, लेकिन वार्ता असफल रही। इसके बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका की तरफ से ईरानी पोर्ट्स पर नाकेबंदी की जाएगी। इसके चलते होर्मुज पर जहाजों का आवागमन प्रभावित होने की आशंका जताई जाने लगी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के अनुरूप' उठाया जा रहा है। यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से प्रस्थान करने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू की जाएगी। इसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं।
सेंटकॉम ने एक बयान में कहा कि उसकी सेनाएं गैर-ईरानी बंदरगाहों से ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आने-जाने वाले जहाजों के लिए बाधा नहीं डालेंगी। नाकेबंदी शुरू होने से पहले वाणिज्यिक नाविकों को एक औपचारिक नोटिस के माध्यम से अतिरिक्त जानकारी प्रदान की जाएगी। खास बात है कि ईरान ने साफ कर दिया है कि होर्मुज पर अब भी उसका नियंत्रण है।
परमाणु का दिया हवाला
ट्रंप ने 'ट्रूथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन सभी जहाजों की पहचान करने और उन्हें रोकने का निर्देश दिया है जिन्होंने ईरान को टोल का भुगतान किया है। उन्होंने कहा, 'जो कोई भी अवैध टोल का भुगतान करेगा, उसे समुद्र में सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं मिलेगी।' उन्होंने दावा किया कि अन्य देश भी होर्मुज की इस नाकेबंदी में शामिल होंगे।
ट्रंप ने कहा, 'उन्हें पैसा चाहिए और उससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि उन्हें परमाणु चाहिए। इसके अतिरिक्त हम पूरी तरह से 'तैयार और मुस्तैद' हैं और हमारी सेना उचित समय पर ईरान के बचे-खुचे हिस्से को भी पूरी तरह से नष्ट कर देगी।' ट्रंप ने कहा, 'तो, बात यह है कि बैठक अच्छी रही, ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति बन गई, लेकिन एकमात्र मुद्दा जो वास्तव में मायने रखता था, यानी परमाणु, उस पर सहमति नहीं बन पाई।'
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन