Iran Crisis Shakes Global Giants, Yet India Stands Resilient Amidst Turbulence; How Turned Adversity into Opportunity ईरान संकट से हिल गए बड़े-बड़े सूरमा, पर हिचकोले खाकर भी अटल रहा भारत; आपदा को यूं बना लिया अवसर, India News in Hindi - Hindustan
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ईरान संकट से हिल गए बड़े-बड़े सूरमा, पर हिचकोले खाकर भी अटल रहा भारत; आपदा को यूं बना लिया अवसर

रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही वैश्विक परिस्थितियों से भारतीय अर्थव्यवस्था थोड़ी प्रभावित हुई हो लेकिन मजबूत घरेलू मांग, स्थिर वित्तीय स्थिति और नीतिगत सुरक्षा कवच के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

Wed, 6 May 2026 07:54 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ईरान संकट से हिल गए बड़े-बड़े सूरमा, पर हिचकोले खाकर भी अटल रहा भारत; आपदा को यूं बना लिया अवसर

ईरान-अमेरिका के बीच दो महीने से भी ज्यादा समय से जारी तनातनी, संघर्ष और युद्ध की आहट ने न सिर्फ इन दोनों देशों को अस्थिर कर रखा है बल्कि पूरे वैश्विक बाजारों को हिला कर रख दिया है। तेल के खेल में कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हिल गई हैं लेकिन इन सब झंझावातों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई खास असर नहीं पड़ा है और वह इस विपरीत हालात में भी सीना ताने खड़ी है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, समुद्री रास्तों में बाधा और वैश्विक पूंजी के उतार-चढ़ाव ने माहौल को अनिश्चित बना दिया है। फिर भी वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट एक दिलचस्प तस्वीर पेश करती है, जिसमें कहा गया है कि भारत “झटकों से अछूता नहीं, लेकिन मजबूत” बना हुआ है।

वित्त मंत्रालय की नवीनतम मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था "लचीली (resilient) बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही वैश्विक परिस्थितियों से अर्थव्यवस्था थोड़ी प्रभावित हुई हो और कंपन महसूस की हो लेकिन मजबूत घरेलू मांग, स्थिर वित्तीय स्थिति और नीतिगत सुरक्षा कवच के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वहीं केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी मानता है कि भारत की आर्थिक बुनियाद पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है, जो उसे ऐसे बाहरी झटकों को झेलने में मदद देती है।

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चुनौतियों का चौतरफा हमला

बता दें कि ईरान-अमेरिका संघर्ष ने कई मोर्चों पर जोखिम बढ़ा दिए हैं, जिनमें ऊर्जा आयात, आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति (inflation) प्रमुख हैं। कच्चे तेल की कीमतें हाल के हफ्तों में 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई पर सीधा असर पड़ने का खतरा है। इसके अलावा व्यापार के मोर्चे पर भी दबाव दिख रहा है। मार्च में भारत का निर्यात 7.44% गिरकर 38.92 बिलियन डॉलर रह गया, जबकि व्यापार घाटा भी बढ़ता जा रहा है। इसके अतिरिक्त, भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 2026 के पहले चार महीनों में 1.8 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है।

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भारत की मजबूती के प्रमुख स्तंभ

इनके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस बार पिछले संकटों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। इसकी मजबूती के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:

घरेलू मांग: भारत की जीडीपी का 60% से अधिक हिस्सा घरेलू खपत से आता है, जो अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के खिलाफ एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, निजी खपत और निवेश ही आर्थिक गति के मुख्य चालक बने हुए हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा बताए गए हाई-फ़्रीक्वेंसी संकेतक—वाहन बिक्री से लेकर GST संग्रह तक—यह बताते हैं कि भले ही विकास की गति धीमी हो रही हो, लेकिन मांग अभी भी मज़बूत बनी हुई है।

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विदेशी मुद्रा भंडार: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) वर्तमान में एक मजबूत स्थिति में है, जो वैश्विक आर्थिक झटकों और युद्ध जैसी स्थितियों में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक "सुरक्षा कवच" की तरह काम करता है। 3 अप्रैल 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था, जो लगभग 11 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है।

मजबूत बैंकिंग प्रणाली: पिछले संकटों के विपरीत, भारत इस झटके का सामना बैलेंस शीट की समस्या के साथ नहीं कर रहा है। RBI बुलेटिन ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFC) मज़बूत पूंजी पर्याप्तता, बेहतर संपत्ति गुणवत्ता और मज़बूत तरलता बफ़र बनाए हुए हैं। कॉर्पोरेट लीवरेज भी अपेक्षाकृत कम है, जिससे कंपनियों को लागत के दबाव को झेलने और हालात स्थिर होने पर निवेश करने की गुंजाइश मिलती है।

सरकार और आरबीआई की रणनीतिक प्रतिक्रिया

स्थिति को संभालने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने टैक्स समायोजन के जरिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के झटके को काफी हद तक खुद अवशोषित किया है ताकि आम उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। इसके अलावा, निर्यातकों की मदद के लिए 497 करोड़ रुपये का 'रिलीफ' (RELIEF) पैकेज शुरू किया गया है और कच्चे तेल के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश की जा रही है।

आगे क्या?

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह संकट भारत के लिए अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार लाने का एक अवसर भी है। भविष्य के झटकों से बचने के लिए आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु क्षमता को बढ़ाना और वैकल्पिक व्यापार मार्ग सुरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो विकास दर धीमी हो सकती है, लेकिन भारत की बेहतर बुनियादी स्थिति और नीतिगत लचीलापन इसे इस वैश्विक 'स्ट्रेस टेस्ट' से उबरने में मदद कर सकते हैं।