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भारत के एक स्टार्टअप ने उड़ाई पाकिस्तान-चीन की नींद, दृष्टि सैटेलाइट कैसा बनेगा नई मुसीबत

दृष्टि उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक ऑप्टो SAR तकनीक है। यह टेक्नोलॉजी ऑप्टिकल इमेजिंग और सिंथेटिक अपर्चर रडार का कॉम्बिनेशन है, जिससे यह उपग्रह दिन-रात और हर मौसम में काम करने में सक्षम है। 

Sun, 3 May 2026 05:04 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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भारत के एक स्टार्टअप ने उड़ाई पाकिस्तान-चीन की नींद, दृष्टि सैटेलाइट कैसा बनेगा नई मुसीबत

बेंगलुरु स्थित भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप गैलेक्सआई अपना पहला उपग्रह दृष्टि मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है। इस सैटेलाइट को अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स के फाल्कॉन 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह प्रक्षेपण कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से किया जाएगा। इस मिशन को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश की तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।

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दृष्टि उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक ऑप्टो SAR तकनीक है। यह टेक्नोलॉजी ऑप्टिकल इमेजिंग और सिंथेटिक अपर्चर रडार का कॉम्बिनेशन है, जिससे यह उपग्रह दिन-रात और हर मौसम में काम करने में सक्षम है। सामान्य उपग्रह बादलों, बारिश या अंधेरे में स्पष्ट तस्वीरें नहीं ले पाते, लेकिन दृष्टि इन सभी बाधाओं के बावजूद सटीक और साफ फोटो ले सकता है। इससे पृथ्वी की सतह की लगातार निगरानी संभव हो सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत जानकारी मिल पाएगी।

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दृष्टि उपग्रह की खासियत जानें

करीब 190 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह भारतीय निजी क्षेत्र की ओर से विकसित प्रमुख उपग्रहों में से एक है। इसमें अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेस करने के लिए एआई आधारित सिस्टम लगाया गया है, जो तेजी से उपयोगी जानकारी तैयार करता है। इस तकनीक का उपयोग कृषि, आपदा प्रबंधन, शहरी योजना, समुद्री निगरानी और रक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में किया जा सकेगा। खासकर आपदा के समय रियल-टाइम इमेजिंग से राहत और बचाव कार्यों में काफी मदद मिलेगी।

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यह मिशन भारत के बढ़ते अंतरिक्ष स्टार्टअप कदम को और मजबूत बनाता है। दृष्टि के सफल प्रक्षेपण के बाद गैलेक्सआई भविष्य में ऐसे कई उपग्रह बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे पूरी पृथ्वी की निरंतर निगरानी की जा सके। इससे भारत को रणनीतिक और आर्थिक दोनों तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, देश वैश्विक अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। यह मिशन भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन की भी टेंशन बढ़ाने वाला है।