India-Bangladesh Ties Rest on the Waters of the Ganges Tariq Minister Issues a Blustering Threat Over Farakka ‘गंगा जल पर टिका है भारत-बांग्लादेश का रिश्ता’; फरक्का को लेकर तारिक के मंत्री की गीदड़भभकी, India News in Hindi - Hindustan
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‘गंगा जल पर टिका है भारत-बांग्लादेश का रिश्ता’; फरक्का को लेकर तारिक के मंत्री की गीदड़भभकी

बांग्लादेश का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में स्थित भारत के फरक्का बैराज के कारण सूखे के मौसम में पानी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे तटीय इलाकों में खारे पानी कम हो गया और कृषि को भारी नुकसान हुआ है।

Sun, 17 May 2026 11:27 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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‘गंगा जल पर टिका है भारत-बांग्लादेश का रिश्ता’; फरक्का को लेकर तारिक के मंत्री की गीदड़भभकी

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के बाद अब गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर हलचल और बयानबाजी तेज हो गई है। बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत के साथ ढाका के भविष्य के संबंधों का आधार गंगा जल साझाकरण संधि का नवीनीकरण होगा। बांग्लादेश ने भारत से मांग की है कि दोनों देश तुरंत एक नए समझौते के लिए बातचीत शुरू करें, जो बांग्लादेशी जनता की अपेक्षाओं और जरूरतों को पूरा करता हो।

भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान 30 वर्षों के लिए गंगा जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह ऐतिहासिक समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त होने जा रहा है।

ढाका में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए BNP के महासचिव और ग्रामीण विकास एवं सहकारिता मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा, "भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का अवसर गंगा जल साझाकरण संधि या फरक्का समझौते के हस्ताक्षर पर निर्भर करेगा। नया समझौता बांग्लादेश के लोगों के हितों के अनुरूप होना चाहिए। इसके अलावा जब तक नया समझौता फाइनल नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान व्यवस्था लागू रहनी चाहिए। हम यह भी सुझाव देते हैं कि भविष्य का जल-बंटवारा किसी निश्चित समय-सीमा के लिए न होकर अनिश्चित कालीन होना चाहिए।"

क्यों संवेदनशील है गंगा नदी का मुद्दा?

भारत से चपाई नवाबगंज के रास्ते बांग्लादेश में प्रवेश करने वाली गंगा नदी को वहां पद्मा के नाम से जाना जाता है। बांग्लादेश की 17 करोड़ की आबादी में से लगभग एक-तिहाई हिस्सा अपनी आजीविका और पारिस्थितिक स्थिरता के लिए इसी नदी तंत्र पर निर्भर है। बांग्लादेश में कुल 54 ऐसी नदियां बहती हैं जो भारत से होकर आती हैं।

फरक्का बैराज पर विवाद

बांग्लादेश का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में स्थित भारत के फरक्का बैराज के कारण सूखे के मौसम में पानी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे तटीय इलाकों में खारे पानी कम हो गया और कृषि को भारी नुकसान हुआ है। इसके विपरीत, भारत का हमेशा से यह रुख रहा है कि फरक्का बैराज का निर्माण मुख्य रूप से हुगली नदी में पानी का रुख मोड़कर तलछट को साफ करने और कोलकाता बंदरगाह को नौवहन के योग्य बनाए रखने के लिए किया गया था।

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गंगा संधि पर जारी संशय के बीच बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक मेगा बैराज परियोजना को मंजूरी दे दी है। ढाका का कहना है कि इसका उद्देश्य फरक्का बैराज के नकारात्मक प्रभाव को बेअसर करना है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई, जो 2033 तक पूरा होगा। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शहिदुद्दीन चौधरी एनी ने कहा कि यह बैराज बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित में है और इसके लिए भारत से परामर्श करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इस महीने की शुरुआत में BNP नेताओं ने तीस्ता जल-बंटवारे समझौते में देरी को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा था। BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने भारत और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित तीस्ता समझौते को वर्षों तक रोके रखा। इसके साथ ही हेलाल ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत का स्वागत किया। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल में इस राजनीतिक बदलाव के बाद अब तीस्ता समझौते पर रुकी हुई बातचीत दोबारा शुरू हो सकेगी।

इन बयानों के बीच भारत ने साफ किया है कि दोनों देशों के बीच जल संबंधी सभी मुद्दों को मौजूदा द्विपक्षीय मंचों के माध्यम से सुलझाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था, "भारत और बांग्लादेश 54 नदियां साझा करते हैं और सीमा पार जल मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हमारे पास पहले से ही प्लेटफॉर्म हैं, जिनकी बैठकें नियमित अंतराल पर होती रहती हैं।"