What is Ganges Water Treaty How much water does India provide to Bangladesh Uncertainty looms over the Padma Barraj क्या है गंगा जल संधि, बांग्लादेश को कितना पानी देता है भारत? पद्मा बैराज की योजना पर संशय, India News in Hindi - Hindustan
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क्या है गंगा जल संधि, बांग्लादेश को कितना पानी देता है भारत? पद्मा बैराज की योजना पर संशय

BNP प्रवक्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक मेगा बैराज परियोजना के निर्माण को मंजूरी दी है। आपको बता दें कि गंगा नदी को बांग्लादेश में पद्मा कहा जाता है।

Sun, 17 May 2026 05:54 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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क्या है गंगा जल संधि, बांग्लादेश को कितना पानी देता है भारत? पद्मा बैराज की योजना पर संशय

भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुरानी गंगा जल संधि (Ganges Water Treaty) के समाप्त होने की समय-सीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ता दिख रहा है। बांग्लादेश ने शनिवार को स्पष्ट किया कि भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य काफी हद तक इस संधि के नवीनीकरण पर निर्भर करेगा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने इस मुद्दे पर भारत सरकार को एक सीधा और कड़ा संदेश जारी किया है।

उन्होंने कहा, "हम भारत सरकार को यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बांग्लादेश की जनता की अपेक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप, चर्चा के माध्यम से एक नई गंगा जल संधि को तुरंत लागू किया जाना चाहिए। भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि इस संधि का नवीनीकरण होता है या नहीं।"

तनाव के बीच बांग्लादेश का पद्मा बैराज प्रोजेक्ट

BNP प्रवक्ता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक मेगा बैराज परियोजना के निर्माण को मंजूरी दी है। आपको बता दें कि गंगा नदी को बांग्लादेश में पद्मा कहा जाता है। बांग्लादेश का कहना है कि इस बैराज का निर्माण पश्चिम बंगाल में स्थित भारत के फरक्का बैराज के नकारात्मक प्रभावों को बेअसर करने के लिए किया जा रहा है।

बांग्लादेश के लिए फरक्का बैराज हमेशा से एक संवेदनशील और विवादित मुद्दा रहा है। बांग्लादेश का आरोप है कि इस बैराज के कारण सूखे के मौसम में पानी का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में खारे पानी की घुसपैठ बढ़ गई है। इसके विपरीत, भारत हमेशा से यह कहता आया है कि साल 1972 में फरक्का बैराज को इसलिए चालू किया गया था ताकि हुगली नदी में पानी का रुख मोड़कर तलछट को साफ किया जा सके और कोलकाता बंदरगाह को सुरक्षित रखा जा सके।

क्या है गंगा जल संधि?

भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक गंगा जल साझाकरण संधि पर दिसंबर 1996 में नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। इस पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दस्तखत किए थे। यह संधि 30 वर्षों के लिए जल-साझाकरण व्यवस्था और नदी के पानी पर बांग्लादेश के अधिकारों को स्थापित करती है। यह 30 वर्षीय संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है, जिससे इसके नवीनीकरण को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

कैसे होता है पानी का बंटवारा?

यह संधि मुख्य रूप से सूखे या कम प्रवाह वाले दिनों में फरक्का बैराज से दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है। नियम के मुताबिक, यदि फरक्का पर पानी का प्रवाह 70,000 क्यूसेक या उससे कम होता है तो भारत और बांग्लादेश दोनों को 50-50 प्रतिशत पानी मिलता है। 70,000 से 75,000 क्यूसेक के बीच प्रवाह होने की स्थिति में बांग्लादेश को निश्चित तौर पर 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है और शेष पानी भारत के हिस्से जाता है। 75,000 क्यूसेक से अधिक प्रवाह की स्थिति में भारत अपने पास 40,000 क्यूसेक पानी रखता है और बाकी का पूरा पानी बांग्लादेश को दे दिया जाता है।

विवाद की मुख्य वजह?

दोनों देशों के बीच ताजा विवाद तब गहराया जब ढाका ने आरोप लगाया कि भारत फरक्का बैराज से तय सीमा से अधिक पानी निकाल रहा है, जिसके कारण बांग्लादेश की नदियां सूख रही हैं। इस कूटनीतिक गतिरोध के बीच दिसंबर में होने वाला संधि का नवीनीकरण दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।