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सलीम का गेम ओवर, अब तुर्की से भारत लाए जाएंगे 2 और बड़े अपराधी; खूब सहयोग कर रहा मुस्लिम देश

सलीम डोला के प्रत्यर्पण के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां तुर्की से दो और मोस्ट वांटेड अपराधियों, पंजाब के ड्रग किंगपिन नवप्रीत सिंह और एमपी के मोहम्मद सरताज को भारत लाने की तैयारी में जुट गई हैं।

Tue, 26 May 2026 07:07 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सलीम का गेम ओवर, अब तुर्की से भारत लाए जाएंगे 2 और बड़े अपराधी; खूब सहयोग कर रहा मुस्लिम देश

भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी और ड्रग तस्कर सलीम डोला के प्रत्यर्पण के कुछ ही हफ्तों बाद, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने तुर्की में बैठे फरार अपराधियों पर अपना शिकंजा और कस दिया है। भारत अब तुर्की से दो और खूंखार अपराधियों को वापस लाने की तैयारी में है। ये दोनों अपराधी पंजाब और मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और ड्रग्स तस्करी से लेकर रंगदारी व हिंसा के कई गंभीर मामलों में वांटेड हैं।

कौन हैं ये दो मोस्ट वांटेड अपराधी?

भारत सरकार ने जिन दो अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए तुर्की से संपर्क साधा है, उनका आपराधिक रिकॉर्ड बेहद संगीन है।

नवप्रीत सिंह उर्फ 'नव' (पंजाब): 34 वर्षीय नवप्रीत सिंह का नाम कई बड़े नारकोटिक्स (नशीले पदार्थों) मामलों में शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, वह एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट चलाता है और उसकी आखिरी लोकेशन तुर्की ही मिली है। भारत ने साल 2023-24 में ही उसके प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध तुर्की सरकार को सौंप दिया था।

मोहम्मद सरताज (मध्य प्रदेश): 42 वर्षीय मोहम्मद सरताज धमकी देने और हिंसा से जुड़े कई गंभीर मामलों में वांछित है। उसे भारत वापस लाने के लिए पिछले साल ही तुर्की को प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा जा चुका है।

हाल ही में अजरबैजान से लाया गया था सिंडिकेट का हैंडलर

नवप्रीत के ड्रग नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का इंडिया ऑपरेशन संभालने वाले प्रभदीप सिंह को इसी महीने 13 मई को अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। सीबीआई (CBI) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यह संयुक्त कार्रवाई की थी। प्रभदीप साल 2021 में पकड़ी गई 358 किलो हेरोइन के मामले में वांटेड था और 2023 से फरार चल रहा था।

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कैसे फेल हुआ था दाऊद के करीबी का 'मास्टरप्लान'?

हाल ही में 28 अप्रैल को सलीम डोला (59) को तुर्की से भारत लाया गया था। अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़ा डोला साल 2024 में तुर्की इस मंसूबे से गया था कि वहां इन्वेस्टमेंट-लिंक्ड प्रोग्राम (निवेश के बदले नागरिकता) के तहत उसे वहां की नागरिकता मिल जाएगी। लेकिन भारतीय एजेंसियों के अनुरोध पर इंटरपोल ने नोटिस जारी कर दिया। दोनों देशों की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने बेहतरीन तालमेल बिठाकर उसके सारे प्लान पर पानी फेर दिया। सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले डोला फर्जी पासपोर्ट के जरिए किसी दूसरे देश भागने की फिराक में था।

भारत और तुर्की के बीच मजबूत हो रहा सुरक्षा सहयोग

भले ही पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हों, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक तुर्की कानून प्रवर्तन के मामलों में भारत के साथ पूरा सहयोग कर रहा है।

  • भारत और तुर्की के बीच साल 2001 में एक औपचारिक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जो जून 2002 से लागू है।
  • यह ढांचा दोनों देशों को आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों में वांटेड अपराधियों के ट्रांसफर का औपचारिक अनुरोध करने की अनुमति देता है।
  • प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन दोनों देशों के बीच हुए अच्छे सुरक्षा सहयोग के चलते ही चरमपंथियों और ट्रांस-नेशनल ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन मुमकिन हो पा रहा है।

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तुर्की ने अतीत में भी 'इस्लामिक स्टेट' (IS) जैसे चरमपंथी नेटवर्कों से जुड़े संदिग्ध गुर्गों को निर्वासित करने में भारत की मदद की है। अक्सर ऐसे मामलों में इंटरपोल के रेड नोटिस का इस्तेमाल किया जाता है।