भारत ने सिंधु जल संधि पर दिखाया सख्त रुख, हेग ट्रिब्यूनल के फैसले को किया खारिज; अब क्या करेगा पाकिस्तान?
भारत ने शनिवार को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के उस फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर की कुछ जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की आपत्तियों पर सुनवाई की गई थी।

भारत ने शनिवार को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के उस फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर की कुछ जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की आपत्तियों पर सुनवाई की गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि अवैध रूप से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) का 15 मई का यह 'फैसला' भारत को बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। भारत ने पहले भी इस न्यायाधिकरण को कभी मान्यता नहीं दी और अब भी उसके सभी फैसलों को अवैध मानता है।
जायसवाल ने कहा कि भारत तथाकथित फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायाधिकरण की सभी पूर्व घोषणाओं को दृढ़तापूर्वक खारिज किया है। भारत ने कभी भी इस तथाकथित न्यायाधिकरण की स्थापना को मान्यता नहीं दी। इसके द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही या निर्णय अवैध है। उन्होंने आगे कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय अभी भी पूरी तरह लागू है।
बता दें कि भारत ने मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का एकतरफा फैसला लिया था। सरकार का रुख साफ है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त किए बिना यह संधि बहाल नहीं होगी। भारत बार-बार दोहरा चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
दरअसल, भारत का मानना है कि पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का दुरुपयोग कर विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से उठाने की कोशिश की, जबकि संधि के प्रावधानों के अनुसार कुछ मुद्दों का निपटारा तटस्थ विशेषज्ञ या दोनों देशों के बीच बातचीत से होना चाहिए। भारत ने इस पूरे प्रक्रिया को 'अवैध' बताते हुए कहा है कि तथाकथित मध्यस्थता न्यायाधिकरण का गठन ही संधि की भावना के विरुद्ध है।
बता दें कि पिछले साल जून में जारी एक बयान में भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उसने इस मध्यस्थता अदालत को कभी मान्यता नहीं दी। भारत का स्थायी रुख रहा है कि इस निकाय का गठन स्वयं सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। सरकार ने साफ कहा था कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय तरीके से छोड़ने की गारंटी नहीं देता, तब तक संधि लागू नहीं होगी।
विदेश मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया था कि संधि स्थगित रहने तक भारत संधि के किसी भी दायित्व को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं है। किसी भी मध्यस्थता न्यायालय, खासकर इस अवैध रूप से गठित निकाय को, जिसका कानूनी दृष्टि से कोई अस्तित्व ही नहीं है, भारत की संप्रभु कार्रवाइयों की वैधता पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।




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