India Bangladesh Ganges Water Treaty why Bangladesh eager for renewing treaty Khalilur Rehman visit to India भारत के खिलाफ आग उगलने के बाद अब पानी के लिए झुका बांग्लादेश, गंगा जल संधि के लिए क्यों तत्पर, India News in Hindi - Hindustan
More

भारत के खिलाफ आग उगलने के बाद अब पानी के लिए झुका बांग्लादेश, गंगा जल संधि के लिए क्यों तत्पर

भारत और बांग्लादेश ने 1996 में गंगा जल बंटवारा समझौता किया था। इस संधि का मकसद गंगा के पानी का बंटवारा तय करना था, खासतौर पर सूखे मौसम में। इस संधि से बांग्लादेश को कई बड़े फायदे मिलते हैं।

Tue, 31 March 2026 11:16 AMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
share
भारत के खिलाफ आग उगलने के बाद अब पानी के लिए झुका बांग्लादेश, गंगा जल संधि के लिए क्यों तत्पर

बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के राज में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंचने के बाद अब बांग्लादेश पानी के लिए झुकता नजर आ रहा है। भारत संग संबंध सुधारने की कोशिश में बांग्लादेशी विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अपने पहले विदेश दौरे पर भारत आ रहे हैं। इस दौरे से बांग्लादेश को कई उम्मीदें हैं। इनमें सबसे अहम है गंगा जल संधि का नवीनीकरण। इस साल इस संधि की अवधि खत्म हो रही है और बांग्लादेश इसे वापस लागू करने के लिए तत्पर है।

जानकारी के मुताबिक बांग्लादेशी विदेश मंत्री अगले सप्ताह एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मॉरीशस जा रहे हैं। इससे पहले वे भारत में रुकेंगे और कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। सूत्रों ने बताया है कि रहमान 8 अप्रैल को विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर सकते हैं।

पानी के लिए झुका बांग्लादेश

बांग्लादेशी विदेश मंत्री का पहले विदेश दौरे पर भारत आना बांग्लादेश की तत्परता को दर्शाता है। यूनुस सरकार में बांग्लादेश की तरफ से कई बार भारत के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी की गई। अब तारिक रहमान की सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है। शपथ लेते ही बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने की प्रतिबद्धता जताई थी। वहीं बांग्लादेश यह भी जानता है कि पानी से लेकर ईंधन तक, उसका भारत के बिना गुजारा नहीं चल सकता।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:यूनुस राज खत्म होते ही सुधरने लगे संबंध, भारत आएंगे बांग्लादेश के विदेश मंत्री

गंगा जल संधि क्या है?

भारत और बांग्लादेश ने 30 साल पहले 1996 में 30 साल के लिए गंगा जल बंटवारा समझौता किया था। इस संधि का मकसद गंगा के पानी का बंटवारा तय करना था, खासतौर पर सूखे मौसम में। अब इसकी अवधि दिसंबर 2026 में खत्म होने जा रही है। इससे पहले बांग्लादेश इसे दोबारा लागू करना चाहता है। दरअसल इस संधि से बांग्लादेश को कई बड़े फायदे मिलते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बांग्लादेश के हालात खराब, अंधेरे से बचाने के लिए भारत ने फिर भेजी संजीवनी!

बांग्लादेश क्यों है तत्पर?

बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण के लिए तत्पर है। इसकी वजह यह है कि बांग्लादेश को संधि के तहत गंगा के पानी का निश्चित हिस्सा मिलने की गारंटी मिली, जिससे पहले की अनिश्चितता काफी हद तक खत्म हो गई। इस तय जल आपूर्ति ने देश की कृषि व्यवस्था को बड़ा सहारा दिया, क्योंकि सिंचाई के लिए नियमित पानी मिलने से फसल उत्पादन में स्थिरता आई और किसानों को फायदा हुआ।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:भारत संग रिश्ते सुधारने की कोशिश में बांग्लादेश, दिल्ली आ रहे विदेश मंत्री रहमान

साथ ही, यह पानी शहरी और ग्रामीण इलाकों में पीने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखने से नदियों का पारिस्थितिक संतुलन भी बेहतर हुआ। इसके अलावा, गंगा में जल स्तर बनाए रहने से व्यापार और परिवहन को भी बढ़ावा मिला। कुल मिलाकर, इस संधि ने बांग्लादेश की जल, कृषि और पर्यावरण संबंधी जरूरतों को संतुलित किया।

भारत के लिए इस संधि के क्या मायने?

इस संधि से भारत को भी कई रणनीतिक, कूटनीतिक और व्यावहारिक फायदे मिले हैं। सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद काफी हद तक सुलझ गया, जिससे तनाव कम हुआ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक जिम्मेदार और सहयोगी देश के रूप में मजबूत हुई। व्यावहारिक तौर पर देखें तो इस समझौते ने फरक्का बैरेज के संचालन को भी स्थिरता दी। इसके जरिए भारत को अपने बंदरगाह, खासतौर पर कोलकाता पोर्ट में गाद को नियंत्रित करने के लिए जरूरी पानी का प्रबंधन करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, बांग्लादेश के साथ बेहतर संबंधों के कारण भारत को पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ट्रांजिट और कनेक्टिविटी में भी सुविधा मिली, जिससे व्यापार और लॉजिस्टिक्स मजबूत हुए।