1 जून की तारीख हुई मिस! अब कब दस्तक देगा मॉनसून? बढ़े इंतजार के बीच जान लीजिए नई डेट
IMD Monsoon Forecasts: तारीख पे तारीख का डायलॉग तो दामिनी फिल्म में सनी देओल ने मारा था। लेकिन भारत में इस सीजन मॉनसून भी ऐसा ही कुछ कर रहा है। अभी तक तीन बार ऐसा हो चुका है जब मॉनसून आने की तारीख आगे बढ़ चुकी है। चौथी तारीख की भी घोषणा हो चुकी है।

IMD Monsoon Forecasts: तारीख पे तारीख का डायलॉग तो दामिनी फिल्म में सनी देओल ने मारा था। लेकिन भारत में इस सीजन मॉनसून भी ऐसा ही कुछ कर रहा है। अभी तक तीन बार ऐसा हो चुका है जब मॉनसून आने की तारीख आगे बढ़ चुकी है। चौथी तारीख की भी घोषणा हो चुकी है। लेकिन देखना यह है कि भारत में मॉनसून की आमद कब तक होती है?बता दें कि अभी तक मॉनसून केरल पहुंच जाना चाहिए था। लेकिन यह तय शिड्यूल से काफी पीछे चल रहा है। ताजा अनुमानों के मुताबिक अब यह तीन जून को दस्तक दे सकता है। वहीं, कुछ मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह इससे भी आगे जा सकता है। ऐसे में देश के किसानों को चिंता सताने लगी है कि आखिर कब होगी झमाझम बरसात।
पहले क्या बताई थी तारीख
शुरुआत में भारतीय मौसम विभाग ने कहा था मॉनसून 26 मई को केरल पहुंच जाएगा। यह इसकी तय तारीख एक जून से काफी पहले था। उम्मीद जगी थी कि बारिश के मौसम की जल्दी शुरुआत होगी। लेकिन तारीख गुजर गई और बरसात नहीं आई। इसके बाद दूसरी तारीख जारी हुई 28 मई को। मौसम विशेषज्ञों ने अनुमान जताया कि इस दिन भारत में मॉनसून की शुरुआत हो जाएगी। लेकिन तब भी कुछ नहीं हुआ। आखिर, हर मॉनसून के आने की हर बार की तारीख, एक जून तक बात आ गई। हालांकि बरसात इस बार भी नहीं हुई है। अब मौसम विशेषज्ञों ने नई तारीख दी है तीन जून।
आखिर क्यों हो रही है देरी
हर साल दक्षिण पश्चिमी मॉनसून सबसे पहले केरल पहुंचता है। इसके बाद यह उत्तर की तरफ होता हुआ जून के आखिर या जुलाई की शुरुआत में पूरे देश तक जाता है। मॉनसून केरल पहुंचने का हर किसी को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि यह भारत में चार महीने के बरसात के मौसम की आधिकारिक शुरुआत का ऐलान होता है। लेकिन इस साल मॉनसून में देरी क्यों हो रही है? भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून के आगमन के ऐलान के लिए इन तीन बातों का होना बेहद जरूरी है। पहली बात, केरल के तय वेदर स्टेशंस पर कम से कम 60 फीसदी बारिश, अरब सागर पर पश्चिमी हवाओं का एक तय रफ्तार में चलना और सैटेलाइट पर पर्याप्त बादलों का समूह नजर आना। लेकिन इस साल हवाओं के साथ समस्या है। केरल के तट पर पश्चिमी हवाएं काफी कमजोर हैं। इसलिए मॉनसून का ऐलान नहीं किया गया है।
कमजोर हवाओं का असर
केरल तट पर पश्चिमी हवाएं इतनी कमजोर बनी हुई हैं कि वे आधिकारिक मॉनसून की शुरुआत को रफ्तार नहीं दे पाईं। हालांकि नमी मौजूद है और राज्य और लक्षद्वीप के कुछ हिस्सों में पहले ही बिखरी हुई बारिश हो रही है। उधर, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात ने हालत और खराब कर दी। वजह, चक्रवात उन हवाओं को रोक देते हैं और कमजोर कर देते हैं, जो मॉनसून को अंदर भेजती हैं। अब मौसम विभाग को उम्मीद है कि एक जून के आसपास से हवाएं धीरे-धीरे मजबूत होंगी, और मॉनसून शुरू हो जाएगा। हालांकि हालात अभी भी अस्थिर हैं, इसलिए सटीक तारीख बता पाना मुश्किल हो रहा है।
मॉनसून में देरी से भारत में क्या नुकसान
हालांकि मॉनसून में कुछ दिनों की देरी से बहुत परेशानी नहीं है। लेकिन अगर यह लगातार पीछे होता गया तो समस्या बढ़ सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक अगर मॉनसून 8 जून तक भी आता है तो भी बहुत ज्यादा देर नहीं होगी। लेकिन चिंता की बात यह है कि यह तय ही नहीं है कि इसमें कितनी देर होगी। मॉनसून में देरी से तेज गर्मी से जूझ रहे लोगों को भी राहत नहीं मिल पा रही। दूसरी तरफ तेज अल नीनो की चेतावनी है जो मौसम के पैटर्न पर असर डाल रही है।




साइन इन