HPCL Raises Power Petrol Prices By Rs 2 Rupee per Litre amid US Iran War तेल की कीमतों पर ईरान युद्ध का पहला असर, दो रुपये से ज्यादा महंगा हुआ पावर पेट्रोल, Business Hindi News - Hindustan
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तेल की कीमतों पर ईरान युद्ध का पहला असर, दो रुपये से ज्यादा महंगा हुआ पावर पेट्रोल

ईरान और अमेरिका के बीच बीते तीन सप्ताह से युद्ध जारी है। अब भारतीय तेल कंपनियों ने प्रीमियम-ग्रेड पवार पेट्रोल की कीमतों में 2.3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है।

Fri, 20 March 2026 02:39 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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तेल की कीमतों पर ईरान युद्ध का पहला असर, दो रुपये से ज्यादा महंगा हुआ पावर पेट्रोल

Petrol Price Hike: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बाद बनी ईंधन संकट की स्थिति का पहली बार पेट्रोल की कीमतों पर असर पड़ा है। देश में प्रीमियम यानी पावर पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी गई हैं। जानकारी के मुताबिक, प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.30 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। CNBC आवाज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल डीलरों ने इस बात की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल यह कीमतें सिर्फ पावर पेट्रोल की कीमतों पर लागू होंगी और रेगुलर पेट्रोल की कीमत नहीं बढ़ाई गई है।

इस बढ़ोतरी का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो हाई-ऑक्टेन या प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं। बता दें कि प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल आमतौर पर बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और ज़्यादा माइलेज के लिए किया जाता है।

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ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

फिलहाल तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में बढ़ोतरी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। हालांकि जानकारों का मानना ​​है कि ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स खर्च में बदलाव कीमत में बढ़ोतरी की मुख्य वजह हो सकती हैं।

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जरूरत का 88 प्रतिशत आयात करता है भारत

गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और तेहरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। वहीं भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है और उसके लिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल बड़ा व्यापक आर्थिक जोखिम उत्पन्न करता है। यह भारत के चालू खाते के घाटे को भी बढ़ाता है, रुपये पर दबाव डालता है और घरों व व्यवसायों के लिए ईंधन लागत बढ़ाता है।

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होर्मुज से आवाजाही ठप

तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति में बाधा का प्रमुख कारण यह है कि युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। युद्ध से पहले आम तौर पर हर दिन करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 50 लाख बैरल तेल उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरते थे, जो वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। भारत का कच्चे तेल का आधा आयात, 40 प्रतिशत गैस आयात और 85-90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी। ऐसे में भारत के लिए बड़ी चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं।