How Pakistan Saudi Arabia defense deal pale in comparison to the India-UAE $200 billion agreement भारत-यूएई के 200 अरब डॉलर के समझौते के सामने बौनी पड़ी पाक-सऊदी की डिफेंस डील, क्यों अहम?, India News in Hindi - Hindustan
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भारत-यूएई के 200 अरब डॉलर के समझौते के सामने बौनी पड़ी पाक-सऊदी की डिफेंस डील, क्यों अहम?

भारत और यूएई के बीच व्यापार पहले ही 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। इसी आधार पर अब दोनों देशों ने 2032 तक इसे 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

Tue, 20 Jan 2026 10:36 AMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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भारत-यूएई के 200 अरब डॉलर के समझौते के सामने बौनी पड़ी पाक-सऊदी की डिफेंस डील, क्यों अहम?

India-UAE Deal: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सोमवार को एक बेहद अहम रणनीतिक रक्षा साझेदारी की योजना पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दोनों देशों के बीच 2032 तक वार्षिक व्यापार के लिए 200 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कदम पाकिस्तान और सऊदी अरब द्वारा अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के चार महीने बाद उठाया गया है। हालांकि भारत-यूएई के 200 डॉलर के प्रस्तावित समझौते के आगे अब पाकिस्तान और सऊदी की डील बौनी पड़ गई है।

इससे पहले पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने सऊदी अरब के साथ 20 अरब डॉलर के ट्रेड और निवेश का लक्ष्य रखा था। अभी दोनों देशों के बीच करीब 5.7 अरब डॉलर का ही व्यापार होता है और इस समझौते के तहत पहले चरण के 5 अरब डॉलर का निवेश अब तक जमीन पर नहीं पाया है।

कई क्षेत्रों में सीधा निवेश

भारत और यूएई के बीच ट्रेड पहले ही 100 अरब डॉलर को पार कर चुका है। मजबूत नींव को देखते हुए अब दोनों देशों ने 2032 तक इसे 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस समझौतों में कई अहम सेक्टर शामिल हैं। डिफेंस सेक्टर में दोनों देश अब केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संयुक्त हथियार विकास की दिशा में रणनीतिक साझेदारी बनाएंगे।

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वहीं गुजरात के धोलेरा स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन में यूएई एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट, स्मार्ट टाउनशिप और पोर्ट विकसित करेगा। यह निवेश सीधे तौर पर होगा, ना कि कर्ज या क्रेडिट के रूप में। वहीं टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के तहत भारत के IN-SPACe और यूएई स्पेस एजेंसी मिलकर सैटेलाइट फैक्ट्री और लॉन्च कॉम्प्लेक्स बनाएंगे। इसके अलावा न्यूक्लियर एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी समझौते हुए हैं।

क्यों अहम है यह फर्क

पाकिस्तान का 20 अरब डॉलर का लक्ष्य ज्यादातर कर्ज और क्रेडिट पर निर्भर दिखता है, जबकि भारत और यूएई सीधे निवेश, टेक्नोलॉजी साझेदारी और लंबी अवधि की रणनीति पर काम कर रहे हैं। जिस रकम को पाकिस्तान महीनों से सऊदी अरब में हासिल करने की कोशिश कर रहा है, उतनी रकम भारत-यूएई के किसी एक बड़े प्रोजेक्ट, जैसे धोलेरा या हाई-टेक डेटा सेंटर, में लग सकती है। इससे दोनों देशों के एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है।