House maid kalita maji to driver son sabarinathan these became MLAs from bengal to tamil nadu नौकरानी से ड्राइवर का बेटा तक बने विधायक, बंगाल से तमिलनाडु तक और किस-किसका खुला भाग्य, India News in Hindi - Hindustan
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नौकरानी से ड्राइवर का बेटा तक बने विधायक, बंगाल से तमिलनाडु तक और किस-किसका खुला भाग्य

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए चुनाव के परिणाम सिर्फ राजनीतिक बदलाव की कहानी नहीं हैं, बल्कि आम लोगों के असाधारण साहस का जीवंत उदाहरण भी हैं। पांच राज्यों में हुए चुनावों से कुछ ऐसे चेहरे उभर कर सामने आए जो लोगों के लिए मिसाल बनेंगे।

Wed, 6 May 2026 10:26 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नौकरानी से ड्राइवर का बेटा तक बने विधायक, बंगाल से तमिलनाडु तक और किस-किसका खुला भाग्य

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए चुनाव के परिणाम सिर्फ राजनीतिक बदलाव की कहानी नहीं हैं, बल्कि आम लोगों के असाधारण साहस का जीवंत उदाहरण भी हैं। पांच राज्यों में हुए चुनावों से कुछ ऐसे चेहरे उभर कर सामने आए जो लोगों के लिए मिसाल बनेंगे।

बंगाल में घरों में बर्तन मांजने वाली कलिता माझी से लेकर संदेशखाली में हिंसा और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली रेखा पात्रा की बात करें या फिर आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ की। इन्होंने अपने साहस और लोगों के भरोसे के बल पर जीत हासिल की। इनकी जीत दिखाती है कि अब राजनीति केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीनी स्तर से उठने वाली आवाजें भी सत्ता तक पहुंच सकती है।

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घरों में काम करने वाली कलिता बनीं विधायक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने लोकतंत्र की ताकत को उजागर किया है। घरों में काम करने वाली कलिता माझी न केवल चुनाव लड़ी, बल्कि जीत भी दर्ज की। भाजपा की उम्मीदवार कलिता ने ऑसग्राम (एससी) सीट से जीत हासिल की है। वह चार घरों में काम करके हर महीने लगभग 2500 रुपये कमाती हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह लोगों के घरों में काम करती रहीं। हालांकि, लोगों ने उन्हें प्रचार पर ध्यान देने की सलाह दी और पूरा समर्थन भी दिया।

दुष्कर्म पीड़िताओं की मुखर आवाज बनीं रेखा पात्रा

गृहिणी से राजनेता बनी रेखा पात्रा पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना की रहने वाली हैं। संदेशखाली में हिंसा, उत्पीड़न और जमीन से जुड़े विवादों की कथित घटनाओं पर खुलकर बोलने के बाद उनकी ओर लोगों का ध्यान गया। पीड़ितों का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने और जवाबदेही की मांग करने के बाद उनका नाम पश्चिम बंगाल से बाहर भी सुर्खियों में रहा। उनका चुनाव प्रचार मुख्य रूप से सुशासन, महिलाओं की सुरक्षा और उत्तरी बंगाल में ग्रामीण संकट के कथित मुद्दों पर केंद्रित रहा।

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दुष्कर्म पीड़िता की मां न्याय के लिए राजनीति में आईं

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म के बाद हत्या की शिकार हुई पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने न्याय पाने के लिए राजनीति का रास्ता चुना। भाजपा ने उन्हें पनिहाटी सीट से टिकट देकर मैदान में उतारा था। इन्होंने टीएमसी उम्मीदवार को 28,000 से ज्यादा वोटों से हराया। रत्ना ने कहा था कि उन्होंने इस बार चुनाव लड़ने का फैसला इसलिए लिया, ताकि वे अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई जारी रख सकें और पानिहाटी को बुरे लोगों से दूर रख सकें।

Vijay Driver Son R Sabarinathan

तमिलनाडु में ड्राइवर के बेटे की जीत ने सबको चौंकाया

तमिलनाडु में भी एक ऐसी कहानी है, जिसकी चर्चा हर ओर हो रही है। टीवीके प्रमुख विजय के ड्राइवर के बेटे आर सबरीनाथन ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। इस वर्ष मार्च महीने में टीवीके जब अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर रही थी, तब विजय ने खुद अपने हाथों से राजेंद्रन के बेटे सबरीनाथन को विरुगंबक्कम से टिकट सौंपा था। उस दौरान सबरीनाथ के साथ राजेंद्रन भी मौजूद थे। सबरीनाथन थलपति विजय से टिकट लेते समय काफी भावुक भी हो गए थे।

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