क्या भारत से नाराज हो गए रूस और ईरान, BRICS का प्रस्ताव बना वजह? सरकार ने दिया जवाब
BRICS दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना और वैश्विक राजनीति में अपनी बात मजबूती से रखना है। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

BRICS देशों से जुड़ी एक खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी, जिसका भारतीय विदेश मंत्रालय ने खंडन किया है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि डी डॉलराइजेशन यानी डॉलर मुक्त व्यापार को लेकर भारत के रुख से रूस समेत कई देश नाराज हैं। वहीं, सवाल उठाया जा रहा था कि ब्रिक्स में पाकिस्तान अब भारत की जगह ले सकता है क्या?
वायरल पोस्ट में क्या
ग्लोबल वॉचडॉग नाम के एक एक्स यूजर ने पोस्ट किया था, जिसमें भारत के कई देशों से संबंधों को लेकर दावे किए गए थे। पोस्ट के अनुसार, 'अर्जेंट: भारत ने ब्रिक्स के डॉलर मुक्त व्यापार के कदम को ब्लॉक कर दिया है, खुद को समिट से भी अलग कर लिया है। रूस, चीन, ईरान गुस्से में हैं। कोई साझा बयान जारी नहीं हुआ है। क्या ब्रिक्स अब भारत को पाकिस्तान से रिप्लेस कर देगा?'
एक्स पर ही जीबीएक्स नाम के यूजर ने भी इससे मिलता जुलता दावा किया है। पोस्ट में कहा गया, 'भारत ने ब्रिक्स देशों के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि व्यापार डॉलर के बजाए स्थानीय मुद्राओं में किया जाएगा। यह भी कहा गया है कि है कि नरेंद्र मोदी का रुख इजरायल समर्थक है।'
झूठे हैं दोनों दावे
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन दोनों दावों को खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने वायरल पोस्ट के स्क्रीनशॉट शेयर किए और लिखा, 'फेक न्यूज अलर्ट, प्लीज सोशल मीडिया पर ऐसे झूठे और निराधार दावों से अलर्ट रहें।'
क्या है ब्रिक्स
BRICS दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना और वैश्विक राजनीति में अपनी बात मजबूती से रखना है। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। हाल ही में ब्रिक्स देशों के मंत्रियों की एक बैठक हुई थी।
भारत ने हाल ही में यहां ब्रिक्स देशों के उप विदेश मंत्रियों और पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका मामलों के विशेष दूतों (ब्रिक्स MENA) की बैठक की अध्यक्षता की। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण मतभेदों के चलते इसमें कोई आम सहमति नहीं बन सकी। पश्चिम एशिया संघर्ष पर आम सहमति न बन पाने के कारण अंत में एक बयान जारी किया गया था।
बैठक पर भारत ने दी प्रतिक्रिया
पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित एक ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत का क्या रुख है। क्योंकि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नई दिल्ली ने पिछले सप्ताह आयोजित ब्रिक्स बैठक के दौरान फलस्तीन पर अपने लंबे समय से चले आ रहे रुख में 'नरमी' दिखाई, जिससे शायद सहमति नहीं बन पाई। इस पर जायसवाल ने पत्रकारों से कहा, ' मैं इस मामले में स्पष्ट कर दूं... हमने हाल ही में हुई ब्रिक्स अधिकारियों की बैठक पर कुछ अटकलबाजी और गलत खबरें देखी हैं।'
उन्होंने कहा, 'यह बैठक दिल्ली में हुई थी। इस निष्कर्ष का समर्थन उपस्थित सभी पक्षों ने किया था, जिसमें फिलिस्तीन भी शामिल था।' जायसवाल ने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स के कई सदस्य देशों ने शर्म अल-शेख शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया, गाजा शांति योजना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 का समर्थन किया।
जायसवाल ने कहा कि 'हाल ही में हुई ब्रिक्स बैठक में मतभेद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण थे।' जायसवाल ने ब्रीफिंग में कहा कि बैठक के बाद अध्यक्ष का बयान जारी किया गया क्योंकि संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। भारत वर्तमान में ब्रिक्स का अध्यक्ष है।




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