बैंक धोखाधड़ी मामले में ED का तगड़ा एक्शन, 35 करोड़ रुपये की संपत्तियां हुईं जब्त
आरोपियों ने SBI और बैंक ऑफ महाराष्ट्र से ऋण प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया। उन्होंने संपत्तियों के मालिकाना हक और स्थिति का गलत प्रतिनिधित्व किया। विवादित भूमि शीर्षकों से जुड़े अहम तथ्यों को छिपाया।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत बैंक धोखाधड़ी मामले में 35.05 करोड़ रुपये मूल्य की दो अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई बीएनआर इंफ्रा एंड लीजिंग, एलीट इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ की गई है। ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने बीरेड्डी नरसिम्हा रेड्डी और अनिल बेनिप्रसाद अग्रवाल से संबंधित इन संपत्तियों को अटैच किया है, जिसमें एक भूमि खंड और एक आवासीय फ्लैट शामिल हैं। जांच सीबीआई की ओर से दर्ज 2 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें चेन्नई की आर्थिक अपराध शाखा और हैदराबाद की एंटी करप्शन ब्यूरो शामिल हैं।
आरोपियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र से ऋण प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया। उन्होंने संपत्तियों के मालिकाना हक और स्थिति का गलत प्रतिनिधित्व किया। साथ ही, विवादित भूमि शीर्षकों से जुड़े अहम तथ्यों को छिपाया। फर्जी भूमि रूपांतरण प्रमाणपत्र, स्वामित्व संबंधी निर्मित घोषणाएं और अन्य जाली कागजात बैंकों को सौंपे गए। इससे एसबीआई को करीब 8.20 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 26.86 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ। कुल मिलाकर लगभग 35 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का यह मामला सामने आया है।
कैसे की गई यह धोखाधड़ी
ईडी की जांच में पता चला कि आरोपियों ने कृषि भूमि को गैर-कृषि के रूप में दिखाकर या पहले से विवादित संपत्तियों को गिरवी रखकर ऋण हासिल किए। साजिश के तहत कम्फर्ट सिक्योरिटीज लिमिटेड के निदेशक अनिल बेनिप्रसाद अग्रवाल के साथ मिलकर एक फर्जी निर्माण समझौता तैयार किया गया। इसके आधार पर एसबीआई से 1 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी प्राप्त की गई, जिसे बाद में बिना किसी वास्तविक कार्य के बेईमानी से भुनाया गया। इस धोखे से बैंकों को सीधा नुकसान पहुंचा और आरोपियों को गलत लाभ हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि धोखाधड़ी से प्राप्त ऋण राशि को विभिन्न ग्रुप कंपनियों और नियंत्रित यूनिट्स के माध्यम से रूट किया गया। इस पैसे का इस्तेमाल असंबंधित देनदारियों के भुगतान, अन्य फर्मों में डायवर्शन और नई संपत्तियों के अधिग्रहण में किया गया। ईडी ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के इस नेटवर्क को पूरी तरह उजागर करने के लिए जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में जाली दस्तावेजों के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है।




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