सुप्रीम कोर्ट में मामलों की लिस्टिंग और बेंच आवंटन करेगा AI, आखिर क्यों हुआ यह फैसला
यह फैसला एक हालिया घटना के बाद लिया गया, जिसमें रजिस्ट्री की ओर से गंभीर चूक सामने आई। एक याचिका, जो पहले ही तीन जजों की बेंच से खारिज की जा चुकी थी, दोबारा कारण सूची में शामिल हो गई।

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम प्रशासनिक सुधार की घोषणा की है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सॉफ्टवेयर को मामलों की लिस्टिंग और बेंच आवंटन का काम सौंपा जाएगा। इससे इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने यह फैसला लिया है, जैसा कि विश्वसनीय सूत्रों ने बताया। फिलहाल CJI को मास्टर ऑफ रोस्टर के रूप में बेंच आवंटन की शक्ति प्राप्त है, जो अक्सर जांच और विवादों का विषय बन जाती है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक कार्यों में बड़ा बदलाव लाने वाला है, जो वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों को दूर करने की दिशा में है।
यह निर्णय एक हालिया घटना के बाद लिया गया, जिसमें रजिस्ट्री की ओर से गंभीर चूक सामने आई। एक याचिका, जो पहले ही तीन जजों की बेंच से खारिज की जा चुकी थी, दोबारा कारण सूची में शामिल हो गई। CJI सूर्यकांत ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई और मामले को लंबित रखते हुए गहन जांच के आदेश दिए। इस घटना ने रजिस्ट्री में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों की जड़ता, पुरानी तकनीकी व्यवस्था और अनियमित आवंटन जैसी समस्याओं को उजागर किया। इन कमियों के कारण न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं। AI का उपयोग इन सभी मुद्दों को निष्पक्ष तरीके से हल करने में मदद करेगा।
किस तरह के काम होंगे आसान
AI सॉफ्टवेयर के लागू होने से मामलों का आवंटन पूरी तरह से स्वचालित हो जाएगा, जिससे मानवीय त्रुटियां, पक्षपात या अनियमितताओं की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। इससे कोर्ट की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, पुराने मामलों का बोझ कम होगा और न्याय वितरण की गति तेज होगी। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में अधिकारियों के अंतर-विभागीय तबादलों की अभूतपूर्व श्रृंखला शुरू हो चुकी है, जो वर्षों पुरानी जड़ता को तोड़ने का प्रयास है। महीने के अंत तक एक और दौर के तबादले होने की संभावना है। यह कदम E-कोर्ट्स प्रोजेक्ट और SUPACE जैसे मौजूदा AI टूल्स के साथ जुड़कर न्यायपालिका को और अधिक आधुनिक बनाएगा।
यह सुधार न केवल तकनीकी उन्नति का प्रतीक है, बल्कि न्यायिक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाता है। AI के माध्यम से प्रक्रिया को निष्पक्ष और कुशल बनाने से जनता का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बढ़ेगा। हालांकि, कार्यान्वयन के दौरान डेटा सुरक्षा, सॉफ्टवेयर की सटीकता और अपील प्रक्रिया जैसे पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक होगा। कुल मिलाकर, यह कदम भारतीय न्यायपालिका को समय के साथ बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो मानवीय हस्तक्षेप से उत्पन्न खामियों को दूर कर तेज और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करेगा।




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