दिग्विजय सिंह के RSS की तारीफ करने पर बवाल, सलमान खुर्शीद बोले- मजबूत तो डाकू भी होता है
दिग्विजय सिंह ने आरएसएस के संगठन की ताकत की तारीफ करके पार्टी में हंगामा खड़ा कर दिया। सलमान खुर्शीद ने कहा कि जिसने यह बात कही है, उससे इसके स्पष्टीकरण पर पूछना चाहिए। डाकू भी मजबूत होता है, तो क्या आप अपने बच्चों से कहते हो कि डाकू बनो?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के आरएसएस और भाजपा के संगठन की तारीफ करने पर कांग्रेस में बवाल मच गया है। कई नेताओं ने दिग्विजय के बयान का विरोध किया है। वहीं, पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने शोले फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत तो डाकू भी होता है, तो क्या आप अपने बच्चों से डाकू बनने को कहते हैं? खुर्शीद ने आरोप लगाया कि देश के सभी संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है, जिसके खिलाफ अंतिम सांस तक पार्टी लड़ती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय की शब्दावली और संदर्भ पर ध्यान देने की जरूरत है।
दिग्विजय सिंह ने शनिवार को उस समय राजनीतिक हलचल मचा दी थी, जब उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगठनात्मक ताकत की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि किस तरह एक जमीनी कार्यकर्ता अपने नेताओं के चरणों में बैठकर सीखता हुआ मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बना। उन्होंने कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा से मुकाबले और उसे सत्ता से हटाने के लिए यह बेहद जरूरी है।
इस मामले में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा, ''जिसने यह बात कही है, उससे इसके स्पष्टीकरण पर पूछना चाहिए। डाकू भी मजबूत होता है, तो क्या आप अपने बच्चों से कहते हो कि डाकू बनो? शोले मूवी में डायलॉग था कि 'दूर-दूर तक बच्चा रोता है तो मां कहती है कि चुप हो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा।' तो क्या आप ऐसा समाज बनाना चाहते हैं कि उसके डर से रोने की भी इजाजत नहीं देंगे। कौन कितना मजबूत है, किस परिस्थिति में है, यह अलग बात है। हम आरएसएस की तरह अपने को मजबूत नहीं करना चाहते। हम लोग तो आरएसएस का विरोध करते हैं। मैं, दिग्विजय, राहुल गांधी समेत सब विरोध करते हैं। आरएसएस की जगह पर हम चाहेंगे ऐसा समाज बनाएं, जिसमें वह गलतियां न हो, जैसे कि आरएसएस में हैं।''
जब खुर्शीद से पूछा गया कि क्या भाजपा और संघ गब्बर जैसा किरदार है, जिसमें डर है, तो उन्होंने कहा कि हम तो मानते हैं कि डर और खौफ है। इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा है कि डरो मत। हम लोग नहीं डरेंगे। जिस तरह से संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, उसका एक ही जवाब है कि अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे और डरेंगे नहीं। उन्होंने यह भी कहा, ''शब्दावली और संदर्भ पर ध्यान देने की जरूरत है। दिग्विजय सिंह के बारे में कोई नहीं सोच सकता कि जो भी कहेंगे, वह कांग्रेस के हित में नहीं होगा। वे कांग्रेस के स्तंभ हैं। अगर उन्होंने विशेष भाषा का इस्तेमाल किया है तो समझना चाहिए उनका संदर्भ और निशाना क्या था। उनका कहना है कि हम जो भी कदम उठाएं, वह कांग्रेस की मजबूती के लिए उठाएं। यही संदेश था उनका। अगर यह नहीं समझ आया तो लोग कुछ भी नहीं समझ पाएंगे।''
उन्होंने आगे कहा, ''उनकी छवि या फिर राजनैतिक किरदार पर सवाल उठाना मेरे हिसाब से अनुचित है। ऐसा होना नहीं चाहिए, नहीं तो लोकतंत्र में हम लोग एक-दूसरे से बात नहीं कर पाएंगे। सलमान खुर्शीद ने कहा कि महात्मा गांधी का भी विचार था, जिसपर हम लोगों ने खुद को ढालने की हमेशा कोशिश की। जो अंतिम पंक्ति में खड़ा हुआ निर्बल व्यक्ति है, उसके आंसू पोछना हमारा कर्तव्य बनता है। संगठन और जो व्यवस्था है, उसे बताने का सभी का अलग-अलग तरीका होता है। राहुल गांधी ने पैदल चलकर दिखाया कि किस तरह से आम जनता की भावना को कैसे समझा जाता है।




साइन इन