डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 15 करोड़ रुपये की ठगी, फर्जी CBI अफसर बनकर बिजनेसमैन को कैसे लगाया चूना
फर्जी सीबीआई अधिकारी ने गिरफ्तारी की धमकी देते हुए पीड़ित को लगातार संपर्क में रखा। उन्होंने फर्जी सुप्रीम कोर्ट नोटिस और सीबीआई-आरबीआई की शिकायतों की कॉपी दिखाकर विश्वास दिलाया।

कर्नाटक के बेलगावी जिले में साइबर फ्रॉड का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 81 वर्षीय बिजनेसमैन को धोखेबाजों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 15 करोड़ रुपये ठग लिए। धोखेबाजों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग अजित गोपालकृष्ण सराफ को संपर्क किया। यह ठगी फरवरी के पहले सप्ताह से शुरू होकर लगभग छह सप्ताह तक चली, जिसमें पीड़ित को बार-बार फोन कॉल और वीडियो कॉल के जरिए डराया-धमकाया गया।
पुलिस के अनुसार, यह कर्नाटक में अब तक का सबसे बड़ा सिंगल पर्सन से जुड़ा साइबर फ्रॉड मामला है। पीड़ित के बेटे ने 18 मार्च को शहर के साइबर, आर्थिक व नारकोटिक्स पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। धोखेबाजों ने पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि व्यवसायी के बैंक खाते जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े एक मामले में लिंक पाए गए हैं और उन्होंने 25 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में 5 लाख का कमीशन लिया है। फर्जी सीबीआई अधिकारी ने गिरफ्तारी की धमकी देते हुए पीड़ित को लगातार संपर्क में रखा। उन्होंने फर्जी सुप्रीम कोर्ट नोटिस और सीबीआई-आरबीआई की शिकायतों की कॉपी दिखाकर विश्वास दिलाया।
बुजुर्ग व्यक्ति को जाल में फंसाया
पीड़ित को बताया गया कि जांच पूरी होने तक उनकी राशि को सुरक्षित सरकारी खाते में ट्रांसफर करना होगा, जिसके बाद पैसा वापस मिल जाएगा। डर के मारे बुजुर्ग ने अपनी लंबे समय से जमा स्टॉक मार्केट की कमाई और अन्य फंड्स को लिक्विडेट करके कई चरणों में पैसे ट्रांसफर किए। ट्रांसफर की राशि हर बार 1 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये तक की थी, जो कुल मिलाकर 15.45 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। धोखेबाजों ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखने के लिए वीडियो कॉल पर लगातार बात की और पीड़ित को घर से बाहर न जाने या किसी को बताने से मना किया।
जांच में पता चला कि कॉल मुख्य रूप से उत्तराखंड से आए थे और पैसे कई लेयर वाली बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए निकाले गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और साइबर क्राइम विशेषज्ञों की टीम सक्रिय है। यह घटना बुजुर्गों और व्यवसायियों के बीच बढ़ते साइबर फ्रॉड के खतरे को दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अधिकारी कभी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे मांगते नहीं हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।




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