Do not understand our silence as our weakness, BCI president tells CJI Suryakant in blunt statement; what is Controversy हमारी चुप्पी और संयम को कमजोरी न समझें, CJI सूर्यकांत को BCI अध्यक्ष की क्यों दो टूक; क्या विवाद?, India News in Hindi - Hindustan
More

हमारी चुप्पी और संयम को कमजोरी न समझें, CJI सूर्यकांत को BCI अध्यक्ष की क्यों दो टूक; क्या विवाद?

BCI अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि इस अदालत की सीधी देखरेख में आयोजित चुनाव के दौरान बार बीसीआई पर व्यापक आरोप लगाने वाली टिप्पणियां यह धारणा पैदा करती हैं कि बार द्वारा दिखाए गए संयम को कमजोरी समझा जा रहा है।

Mon, 26 Jan 2026 09:21 PMPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
share
हमारी चुप्पी और संयम को कमजोरी न समझें, CJI सूर्यकांत को BCI अध्यक्ष की क्यों दो टूक; क्या विवाद?

‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को चिट्ठी लिखकर केरल हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश द्वारा राज्य बार काउंसिल चुनाव को लेकर की गई ‘‘बेबुनियाद और अनुचित’’ मौखिक टिप्पणियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। 26 जनवरी को लिखे पत्र में बीसीआई अध्यक्ष ने कहा कि ये टिप्पणियां केरल बार काउंसिल चुनावों के लिए निर्धारित नामांकन शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते समय की गईं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट्स और अन्य अदालतों को चुनाव संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करने से रोकने के लिए बाध्यकारी निर्देश जारी किए थे।

पत्र में लिखा गया है, ‘‘बीसीआई न्यायिक प्रणाली के कुछ हिस्सों में होने वाली ज्यादतियों, चूक और कुप्रथाओं से भलीभांति अवगत है। फिर भी, इसने न्यायपालिका की गरिमा, विश्वसनीयता और सम्मान, बार और बेंच के बीच संतुलन बनाए रखने तथा न्यायपालिका की बदनामी ना हो, इसके लिए जानबूझकर चुप्पी साध रखी है।’’ बीसीआई अध्यक्ष ने अपनी चिट्ठी में दो टूक कहा है कि इस तरह के संयम को मिलीभगत या कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। खासकर तब जब अधिवक्ताओं के निर्वाचित प्रतिनिधि निकायों पर अनुचित हमले किए जाते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:सब तो तहस-नहस कर दिए, सुखना को अब और कितना सुखाओगे? बीच सुनवाई क्यों बिदके CJI

बार द्वारा दिखाए गए संयम को कमजोरी समझा जा रहा

पत्र में कहा गया, ‘‘इस अदालत की सीधी देखरेख में आयोजित चुनाव के दौरान बार बीसीआई पर व्यापक आरोप लगाने वाली टिप्पणियां यह धारणा पैदा करती हैं कि बार द्वारा दिखाए गए संयम को कमजोरी समझा जा रहा है। ऐसी टिप्पणियां बार और बेंच के बीच संवैधानिक संतुलन को बिगाड़ती हैं, और आपसी सम्मान को संस्थागत टकराव में बदलने का जोखिम पैदा करती हैं।"

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जज होंगे, अदालतें होंगी, लेकिन… SC के जज ने कॉलेजियम सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल

उचित सलाह दें CJI

बीसीआई अध्यक्ष ने कहा कि राज्य बार काउंसिल चुनावों में एकत्रित की गई पूरी राशि संबंधित राज्य बार काउंसिल के पास ही रहती है और बीसीआई को शुल्क का कोई भी हिस्सा प्राप्त नहीं होता है और न ही इससे उसे कोई लाभ मिलता है। बीसीआई अध्यक्ष ने प्रधान न्यायाधीश से उचित सलाह या निर्देश जारी करने पर विचार करने का अनुरोध किया और आग्रह किया कि चुनाव संबंधी मामले उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष तंत्र तक ही सीमित रहें।