brahmos missile demand in muslim countries south china to sea persian gulf full list मुस्लिम देश भी हुए ब्रह्मोस के मुरीद, दक्षिण चीन सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक मची खरीदने की होड़, India News in Hindi - Hindustan
More

मुस्लिम देश भी हुए ब्रह्मोस के मुरीद, दक्षिण चीन सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक मची खरीदने की होड़

दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को खरीदने के लिए मुस्लिम देशों में होड़ मची है। चीन-पाक के तमाम प्रोपगैंडा को फेल कर 'ऑपरेशन सिंदूर' की इस महारत ने भारत को ग्लोबल डिफेंस का नया किंग बना दिया है।

Fri, 29 May 2026 10:33 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
मुस्लिम देश भी हुए ब्रह्मोस के मुरीद, दक्षिण चीन सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक मची खरीदने की होड़

भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम से तैयार दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' ने वैश्विक रक्षा बाजार में अपना डंका बजा दिया है। अब तक जिन मुस्लिम देशों का झुकाव चीन या पश्चिमी देशों के हथियारों की तरफ रहता था, वे अब ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए बेताब हैं। दक्षिण चीन सागर की लहरों से लेकर फारस की खाड़ी के रेतीले तूफानों तक, इस मिसाइल को खरीदने की होड़ यह साबित करती है कि भारत अब एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित हो चुका है।

चीन और पाकिस्तान के तमाम दुष्प्रचारों को दरकिनार करते हुए मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई प्रमुख मुस्लिम देश ब्रह्मोस को अपनी संप्रभुता की रक्षा का सबसे बड़ा हथियार मान रहे हैं।

दक्षिण चीन सागर से फारस की खाड़ी तक मची होड़

ब्रह्मोस की इस महारत ने भू-राजनीतिक समीकरणों को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक विस्तारवाद से परेशान दक्षिण-पूर्व एशिया के मुस्लिम बहुल देश ब्रह्मोस में अपनी सुरक्षा देख रहे हैं।

फिलीपींस: भारत का पहला विदेशी ग्राहक। 2022 में 375 मिलियन डॉलर का सौदा हुआ था, जिसमें ब्रह्मोस की शोर-बेस्ड एंटी-शिप वेरिएंट की तीन बैटरियां शामिल थीं। 2024-25 में डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है और फिलीपींस ने इसके प्रदर्शन की जमकर सराहना की है। यह भारत का पहला बड़ा डिफेंस निर्यात सौदा था।

इंडोनेशिया और मलेशिया: फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया और मलेशिया ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम खरीदने की कतार में सबसे आगे हैं। दक्षिण चीन सागर में चीनी नौसेना की बढ़ती घुसपैठ को रोकने के लिए इन देशों को एक ऐसे 'गेम चेंजर' हथियार की तलाश है जो बीजिंग को बैकफुट पर धकेल सके।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस के प्रदर्शन से खुश होकर 14-17 देशों ने दिलचस्पी जताई है। मलेशिया ने तो अपने Su-30MKM फाइटर जेट्स के लिए एयर-लॉन्च्ड वेरिएंट में रुचि दिखाई है। थाईलैंड, सिंगापुर और ब्रुनेई भी ब्रह्मोस खरीदने की होड़ में हैं।

इनके अलावा, वियतनाम भी बहुत करीब है। 450-700 मिलियन डॉलर के सौदे की चर्चा हो रही है, जिसमें आर्मी और नेवी दोनों के लिए सिस्टम शामिल हो सकते हैं। दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दबाव के कारण वियतनाम की मजबूत दिलचस्पी है। रूस की मंजूरी मिल चुकी है, और सौदा जल्द फाइनल होने की उम्मीद है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:तुर्की की छाती पर भारत का ब्रह्मोस तानेगा साइप्रस, उड़ गई PAK के भाईजान की नींद

फारस की खाड़ी की बात करें तो मध्य पूर्व के अमीर और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण मुस्लिम देश भी ब्रह्मोस के मुरीद हो चुके हैं।

यूएई और सऊदी अरब: खाड़ी देशों (जैसे संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब) ने भी भारत के इस मारक हथियार में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। ईरान समर्थित विद्रोहियों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच, अपने समुद्री व्यापार मार्गों और तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए ब्रह्मोस उनके लिए सबसे सटीक विकल्प बनकर उभरा है। इनके अलावा, कतर, ओमान और मिस्र भी ब्रह्मोस खरीदने की इच्छा जता रहे हैं।

ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना, वेनेजुएला और दक्षिण अफ्रीका भी ब्रह्मोस के मुरीद हैं। ब्रह्मोस का निर्यात भारत की डिफेंस एक्सपोर्ट नीति का बड़ा हिस्सा है। फिलीपींस के बाद ASEAN और मध्य पूर्व में विस्तार हो रहा है।

ब्रह्मोस की ताकत: जिसे रोकना नामुमकिन है

ब्रह्मोस केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान का 'ब्रह्मास्त्र' है। इसकी कुछ प्रमुख खासियतें इसे दुनिया की बाकी मिसाइलों से अलग और बेहद खतरनाक बनाती हैं:

रफ्तार और मारक क्षमता: मैक 2.8 से मैक 3.0 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज) की रफ्तार से उड़ान भरने वाली इस मिसाइल को इंटरसेप्ट करना (बीच हवा में नष्ट करना) दुनिया के किसी भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए लगभग नामुमकिन है।

रडार को चकमा देने की कला: ब्रह्मोस 'स्टील्थ टेक्नोलॉजी' और 'सी-स्किमिंग' क्षमता से लैस है। यह समुद्र या जमीन की सतह से बेहद करीब उड़ान भरती है, जिससे दुश्मन के रडार इसे तब तक नहीं पकड़ पाते, जब तक कि यह तबाही न मचा दे।

बहुआयामी मारक क्षमता: इसे जमीन, हवा, समुद्र और पनडुब्बी, यानी किसी भी प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। इसका 'फायर एंड फॉरगेट' (दागो और भूल जाओ) सिद्धांत इसे अचूक बनाता है।

'ऑपरेशन सिंदूर' ने बढ़ाया ब्रह्मोस का दबदबा

ब्रह्मोस की इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे इसके शानदार ट्रैक रिकॉर्ड का बड़ा हाथ है, जिसमें 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक मील के पत्थर का काम किया। इस ऑपरेशन/परीक्षण ने ब्रह्मोस की मारक सटीकता और किसी भी अभेद्य सुरक्षा चक्र को भेदने की उसकी क्षमता का ऐसा जीवंत प्रदर्शन किया कि पूरी दुनिया इसकी कायल हो गई।

ऑपरेशन सिंदूर ने साफ कर दिया कि चाहे दुश्मन का बंकर कितनी भी गहराई में हो या जंगी जहाज कितने भी कड़े सुरक्षा घेरे में हो, ब्रह्मोस अपने लक्ष्य को नेस्तनाबूद करके ही दम लेती है। इस सफलता ने उन देशों के भीतर भी अटूट विश्वास पैदा किया, जो पहले इस तकनीक को लेकर संशय में थे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:फतह-3 बनाम ब्रह्मोस, मिसाइल पावर में भारत की बराबरी क्यों नहीं कर सकता PAK

चीन और पाकिस्तान का प्रोपगैंडा हुआ फेल

भारत की इस कूटनीतिक और रक्षा क्षेत्र की विजय से चीन और पाकिस्तान बुरी तरह बौखलाए हुए हैं। पाकिस्तान ने कई बार ब्रह्मोस की तकनीक और उसके नेविगेशन सिस्टम को लेकर फर्जी खबरें फैलाईं और इसे असुरक्षित बताने का प्रोपगैंडा चलाया। वहीं, चीन ने अपने 'सरकारी भोंपू' मीडिया के जरिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर दबाव बनाने की कोशिश की ताकि वे भारत से यह मिसाइल न खरीदें।

लेकिन उनका यह सारा प्रोपगैंडा औंधे मुंह गिर गया। अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों ने पाकिस्तान के दावों को सिरे से खारिज कर दिया क्योंकि दुनिया जानती है कि ब्रह्मोस की रिलायबिलिटी (विश्वसनीयता) 99% से अधिक है। आज आलम यह है कि जो देश कभी चीनी हथियारों के खरीदार थे, वे अब भारत के ब्रह्मोस के लिए लाइन में खड़े हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:8 ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस, बराक भी लोडेड; पाक के लिए काल है INS महेंद्रगिरि

ब्रह्मोस अब केवल एक रक्षा उपकरण नहीं रहा, बल्कि यह भारत की कूटनीतिक ताकत और 'मेक इन इंडिया' की वैश्विक सफलता का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। मुस्लिम देशों द्वारा इसकी स्वीकार्यता यह दर्शाती है कि हथियारों के बाजार में अब सिर्फ गुणवत्ता और मारक क्षमता बोलती है, और इस पैमाने पर ब्रह्मोस का फिलहाल कोई सानी नहीं है।