Book Considered Published Only When On Sale Penguin second Clarification within 24 hours In Naravane Row पुस्तक तभी प्रकाशित मानी जाती है, जब... नरवणे की आत्मकथा पर 24 घंटे में पेंगुइन की दूसरी सफाई, India News in Hindi - Hindustan
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पुस्तक तभी प्रकाशित मानी जाती है, जब... नरवणे की आत्मकथा पर 24 घंटे में पेंगुइन की दूसरी सफाई

राहुल गांधी का दावा है कि यह संदेश दर्शाता है कि पुस्तक आम पाठकों के लिए उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने यहां तक कहा कि या तो जनरल नरवणे या फिर पेंगुइन  कोई एक सच नहीं बोल रहा।

Tue, 10 Feb 2026 06:39 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पुस्तक तभी प्रकाशित मानी जाती है, जब... नरवणे की आत्मकथा पर 24 घंटे में पेंगुइन की दूसरी सफाई

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 24 घंटे के अंदर दूसरी बार सफाई पेश की है। नए स्पष्टीकरण में प्रकाशक ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी पुस्तक को तब तक ‘प्रकाशित’ नहीं माना जा सकता, जब तक वह सभी खुदरा माध्यमों पर बिक्री के लिए उपलब्ध न हो। मंगलवार को जारी अपने नए स्पष्टीकरण में पेंगुइन ने कहा कि घोषित शीर्षक, प्री-ऑर्डर लिस्टिंग और वास्तविक प्रकाशन- ये तीन अलग-अलग चरण होते हैं। केवल प्री-ऑर्डर लिंक उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है।

यह नया स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रकाशक के रुख पर सवाल उठाते हुए कथित विरोधाभास की ओर इशारा किया था। राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के वर्ष 2023 के एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें लिखा था- “हैलो फ्रेंड्स, मेरी किताब अब उपलब्ध है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग। जय हिंद।” राहुल गांधी का दावा है कि यह संदेश दर्शाता है कि पुस्तक आम पाठकों के लिए उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने यहां तक कहा कि या तो जनरल नरवणे या फिर पेंगुइन “सच नहीं बोल रहा।” हालांकि, पेंगुइन ने दोहराया कि यह पोस्ट केवल प्री-ऑर्डर लिंक से संबंधित थी और पुस्तक को दो दिन के भीतर वापस ले लिया गया था। प्रकाशक के अनुसार, तब से अब तक फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी किसी भी ई-कॉमर्स या खुदरा मंच पर उपलब्ध नहीं है।

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राजनीतिक तापमान और चढ़ा

इस विवाद में अब राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” बताया और कहा कि वे प्री-ऑर्डर और प्रकाशित पुस्तक के बीच का अंतर तक नहीं समझते। पूनावाला ने यह सवाल भी उठाया कि यदि पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई थी, तो राहुल गांधी के पास उसकी प्रति कैसे पहुँची। उन्होंने इसे कॉपीराइट एक्ट और यहां तक कि ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए।

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पेंगुइन ने क्या लिखा था?

पेंगुइन इंडिया ने इससे पहले सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक औपचारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि पुस्तक के सभी प्रकाशन अधिकार उसी के पास हैं और न तो कोई मुद्रित प्रति, न डिजिटल संस्करण, न ही पीडीएफ किसी भी रूप में सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है। प्रकाशक ने चेतावनी दी कि यदि पुस्तक की कोई भी प्रति कहीं प्रसारित हो रही है, तो वह कॉपीराइट उल्लंघन है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विवाद क्यों?

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब भड़का, जब राहुल गांधी ने लोकसभा में जनरल नरवणे की इस अप्रकाशित आत्मकथा की प्रति दिखाते हुए कथन उद्धृत किया, जिस पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज़ जताया। सत्तापक्ष का कहना है कि अप्रकाशित पुस्तक से संसद में उद्धरण देना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि संवेदनशील रक्षा मामलों से भी जुड़ा हो सकता है। इस तरह, एक पुस्तक, जो अभी पाठकों तक पहुँची भी नहीं-देश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। सवाल अब केवल किताब का नहीं, बल्कि संसदीय मर्यादा, अभिव्यक्ति की सीमाओं और सत्य की परिभाषा का बन चुका है।

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