Big news Are in laws responsible for widowed daughter in law High Court say on the elderly couple petition विधवा बहू की जिम्मेदारी हैं सास-ससुर? बुजुर्ग दंपत्ति की याचिका पर हाई कोर्ट ने क्या कहा, India News in Hindi - Hindustan
More

विधवा बहू की जिम्मेदारी हैं सास-ससुर? बुजुर्ग दंपत्ति की याचिका पर हाई कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस मदन पाल सिंह ने कहा कि भारतीय समाज में सास-ससुर की देखभाल करना बहू की जिम्मेदारी मानी जाती है। लेकिन ऐसे मामलों में उसके ऊपर कानून की कोई बाध्यता नहीं होती है। ऐसे में बहू भरण-पोषण देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

Sun, 29 March 2026 09:07 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
share
विधवा बहू की जिम्मेदारी हैं सास-ससुर? बुजुर्ग दंपत्ति की याचिका पर हाई कोर्ट ने क्या कहा

भारत में नैतिक तौर पर सास-ससुर की सेवा करना उनकी पुत्रवधू यानी बहू का कर्तव्य माना जाता है। कई परिवारों में देखा जाता है कि बेटे के गुजरने के बाद भी विधवा बहू अपने सास-ससुर की देखभाल करती हैं और उनका खर्चा उठाती हैं। लेकिन अब ऐसे मामलों को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नया फैसला सुनाया है। कोर्ट की तरफ से कहा गया कि बहू के ऊपर अपने सास-ससुर के भरण पोषण की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती है। हाई कोर्ट ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि नैतिक जिम्मेदारी चाहें कितनी भी जरूरी और मजबूत क्यों न हो, उसे कानूनी जिम्मेदारी में नहीं बदला जा सकता।

लाइव लॉ, के मुताबिक जस्टिस मदन पाल सिंह ने कहा की बीएनएस की धारा 144 के तहत बहू को सास-ससुर का खर्च उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, "भारतीय कानून के तहत सास-ससुर भरण-पोषण के दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे में बहू को उनका खर्च उठाने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। विधायिका ने अपनी समझ के अनुसार सास-ससुर को इस प्रावधान में शामिल नहीं किया है। इसका मतलब साफ है कि कानून बनाते समय भी इस बात को ध्यान में रखा गया था कि बहू के ऊपर सास-ससुर का खर्चा उठाने की जिम्मेदारी न आए।

क्या है मामला?

यह पूरा मामला आगरा से जुड़ा हुआ है। यहां पर एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने बेटे के गुजर जाने के बाद बहू से गुजारा भत्ता देने की मांग की थी। लेकिन जब बहू ने इससे इनकार किया, तो उन्होंने आगरा फैमली कोर्ट में केस दायर कर दिया।

याचिका में बुजुर्ग दंपत्ति ने तर्क दिया कि उनके बहू उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्सटेबल के तौर पर तैनात है। उसकी आय पर्याप्त है। इसके अलावा जब उनके बेटे का निधन हुआ, तो उसकी नौकरी और बाकी सारे लाभ भी बहू को ही मिले। दंपत्ति ने कहा कि वे बुजुर्ग, अशिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर हैं, अतः बहू से उन्हें गुजारा भत्ता दिलवाया जाए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मकान किराए पर उठाते हैं तो बड़ी खबर, हाई कोर्ट ने किराएदार को दिया झटका
ये भी पढ़ें:कर्मचारी की मौत हो जाए तो क्या परिवार कर सकेगा ये दावा? आया हाई कोर्ट का फैसला
ये भी पढ़ें:क्या बिना सूचना पूजा स्थल सील करने का है अधिकार ? HC ने UP सरकार से मांगा जवाब

इन सभी तर्कों के बाद भी आगरा फैमिली कोर्ट ने अगस्त 2025 में इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद दंपत्ति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की। यहां पर दंपत्ति ने दलील दी कि बहू की नैतिक जिम्मेदारी को कानूनी जिम्मेदारी के तौर पर माना जाना चाहिए, लेकिन अदालत ने इसे नकारते हुए उनकी अपील को खारिज कर दिया। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत बेटे की संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े मुद्दे इस तरह की भरण-पोषण कार्यवाही में शामिल नहीं होते।