allahabad high court asks up government about legal basis to seal place of worship without notice muzaffarnagar case क्या बिना सूचना पूजा स्थल सील करने का है अधिकार ? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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क्या बिना सूचना पूजा स्थल सील करने का है अधिकार ? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

18 मार्च को पारित एक आदेश में, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या किसी निर्माणाधीन पूजा स्थल को बिना पूर्व सूचना जारी किए या याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना सील करने का कोई कानूनी अधिकार है? 

Sat, 28 March 2026 08:02 PMAjay Singh लाइव हिन्दुस्तान
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क्या बिना सूचना पूजा स्थल सील करने का है अधिकार ? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी के मुजफ्फरनगर में एक निर्माणाधीन मस्जिद को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के बाद याचिकाकर्ता द्वारा सील हटाने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या वह बिना किसी पूर्व सूचना या संपत्ति मालिकों को सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी पूजा स्थल को सील कर सकती है? कोर्ट ने सरकार से यह जानना चाहा है कि कानून के किस अधिकार के तहत राज्य किसी पूजा स्थल को सील कर सकता है। इसके साथ ही यह भी जानना चाहा है कि कानून के किस प्रावधान के तहत, यदि कोई हो, तो क्या किसी पूजा-स्थल से संबंधित मामलों में राज्य से पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है।

18 मार्च को पारित एक आदेश में, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य से इस मामले स्थिति स्पष्ट करने को कहा। बार एंड बेंच वेबसाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या किसी निर्माणाधीन पूजा स्थल को बिना पूर्व सूचना जारी किए या याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना सील करने का कोई कानूनी अधिकार है? इसके अलावा, न्यायालय ने यह भी पूछा कि क्या पूजा स्थल परिसर के भीतर निर्माण आदि करने के मामले में मालिकों को राज्य से पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है।

ये है मामला

न्यायालय ने मुजफ्फरनगर जिले में एक मस्जिद को सील किए जाने के खिलाफ अहसान अली द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। अली ने बताया कि वह मुजफ्फरनगर के एक गांव में एक भूखंड के वैध मालिक हैं। उन्होंने यह जमीन प्रवीण कुमार जैन से 2019 में विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खरीदी थी। उन्होंने बताया कि मालिकों द्वारा मस्जिद के चारों ओर सीमा बनाने का काम शुरू करने के बाद अधिकारियों ने हाल ही में उस जमीन पर बनी मस्जिद को सील कर दिया। यह कार्रवाई इस आधार पर की गई कि निर्माण अवैध है और सक्षम प्राधिकारी से कोई पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता के वकील जगदीश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि परिसर को सील करने से पहले उन्हें कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था। अदालत ने राज्य से इस याचिका पर जवाब देने और उस कानून के बारे में बताने को कहा जिसके तहत कार्रवाई की गई थी। अदालत ने आदेश दिया, ‘राज्य हलफनामे सहित विशिष्ट निर्देश प्राप्त करे और अगली सुनवाई की तारीख पर इस अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।’ उच्च न्यायालय में हाल ही में हुए रोस्टर परिवर्तन के बाद, यह मामला 24 मार्च को न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, उस दिन मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी।

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