RSS में महिलाएं कहां हैं? अखिलेश यादव के तंज पर बांसुरी स्वराज ने दिया जवाब
अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा कि आरएसएस में आखिर महिलाएं कहां हैं? कोई बता सकता है कि संघ परिवार ने महिलाओं को अपने संगठन में जगह क्यों नहीं दी। इसका जवाब उन्हें तत्काल तो नहीं मिला, लेकिन कुछ वक्ताओं के बाद महिला आरक्षण पर बोलने के लिए खड़ी हुईं बांसुरी स्वराज ने दिया।

महिला आरक्षण पर संसद में तीन दिनों का विशेष सत्र चल रहा है। इस दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके अलावा परिसीमन पर भी निर्णय होना है। इस बीच जब महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात हुई तो समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस में आखिर महिलाएं कहां हैं? कोई बता सकता है कि संघ परिवार ने महिलाओं को अपने संगठन में जगह क्यों नहीं दी। इसका जवाब उन्हें तत्काल तो नहीं मिला, लेकिन कुछ वक्ताओं के बाद महिला आरक्षण पर बोलने के लिए खड़ी हुईं बांसुरी स्वराज ने दिया।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने विचार परिवार की बात की थी और कहा था कि आपके यहां महिलाओं का स्थान कहां है। इस पर उन्होंने बता देना चाहती हूं कि मैं खुद राष्ट्र सेविका समिति की कार्यकर्ता हूं। यह संगठन बीते 90 सालों से आरएसएस के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। बांसुरी स्वराज ने परिसीमन को लेकर भी बात की और कहा कि इसको लेकर चिंता गलत है। उन्होंने कहा कि परिसीमन सिर्फ एक रास्ता है और उसका परिणाम महिला आरक्षण होगा। उन्होंने कहा कि आप मनमाने तरीके से तो सीटों का आरक्षण नहीं कर पाएंगे। ऐसे में यह जरूरी है कि लोकसभा क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय की जाएं।
उन्होंने सीटें बढ़ाने को लेकर विपक्षी सांसदों के ऐतराज पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अब भी 74 महिलाएं सांसद हैं। अब जिन 272 की बात है, वह उससे अलग हैं। इस तरह महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि आखिर जब देश में 543 सीटें तय की गई थीं, तब देश की आबादी 51 करोड़ थी। अब देश की आबादी तीन गुना बढ़ गई है तो फिर सीटें भी बढ़ाए जाने की जरूरत है। 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का मैप तय होगा। उसका किसी राज्य में सीटों पर असर नहीं होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद इसकी गारंटी दी है।
बांसुरी बोलीं- महिलाएं सब देख रही हैं, सोचकर फैसला लें
बांसुरी स्वराज ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि कौन उनके साथ है और कौन खिलाफ है। यदि आपने महिलाओं की आवाज को दबाने के लिए वोट दिया तो फिर उसके राजनीतिक परिणाम आपको भुगतने होंगे। बता दें कि महिला आरक्षण को 2029 के आम चुनाव से ही लागू करने की तैयारी है। इसी का प्रावधान संशोधन विधेयकों में किया गया है। इसके अलावा कुल सीटों की संख्या 815 किए जाने का प्रस्ताव है और उसके लिए परिसीमन किया जाएगा। किसी भी राज्य का आनुपातिक प्रतिनिधित्व इससे कम नहीं होगा। इसका सरकार ने भरोसा दिलाया है।




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