पार्टी पर भ्रष्ट लोगों का कब्जा; पश्चिम बंगाल में सत्ता जाते ही ममता बनर्जी पर हमले तेज
पश्चिम बंगाल में सत्ता जाते ही ममता बनर्जी के ऊपर पार्टी के अंदर से ही हमले तेज हो गए हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सिरकार ने कहा है कि पार्टी के ऊपर भ्रष्ट लोगों का कब्जा हो गया था। विधानसभा चुनाव में हार के लिए बाहरी कारकों के अलावा अंदरुनी कारक भी जिम्मेदार हैं।

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में सत्ता के जाते ही तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के ऊपर हमले तेज हो गए हैं। पार्टी के कुछ पूर्व नेता अब खुलकर पार्टी के आंतरिक प्रशासन के खिलाफ बोल रहे हैं। पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद और रिटायर आईएएस अधिकारी जवाहर सिरकार ने टीएमसी के ऊपर तीखा हमला करते हुए कहा है कि पार्टी के ऊपर भ्रष्ट लोगों का कब्जा हो गया था। इसी वजह से पार्टी को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
पीटीआई से बात करते हुए सिरकार ने टीएमसी और ममता बनर्जी के ऊपर निशाना साधा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरजी कर रेप केस के दौरान ही जब उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था तभी इन बातों का जिक्र किया था, लेकिन ममता तब ममता ने इसे प्रोपेगेंडा कहकर खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा, "आरजीकर रेप केस के दौरान मेरा इस्तीफा वायरल हो गया था। उसमें मैंने भ्रष्टाचार, दादागिरी का जिक्र किया था। उस वक्त ममता बनर्जी ने इसे प्रोपोगेंडा कहकर खारिज कर दिया था। पार्टी में कुछ नेता हैं, जो कोई काम नहीं करते, लेकिन हैं। उनमें से एक तो क्विज मास्टर है। उन्होंने पार्टी की सत्ता के दौरान गलत काम किए हैं।"
टीएमसी के पूर्व सांसद ने विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत की भूमिका के लिए ममता बनर्जी को ही जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने जोर दिया कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में समय के साथ अपनी पकड़ मजबूत की है। उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी के लिए ममता बनर्जी बंगाल में एक बड़ा सहारा रही हैं। 1990 के दशक में जब उन्होंने अपनी पार्टी बनाई थी, तो उस वक्त राज्य में भाजपा का कोई निशान नहीं था। ममता के साथ गठबंधन की वजह से भाजपा ने यहां पर अपना कैडर बनाना शुरू किया। इसके बाद इसी गठबंधन के आधार पर सीटें जीतना शुरू कीं।"
सिरकार ने कहा, 2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आ गईं, तो उन्होंने कांग्रेस और वामपंथी दलों सहित अन्य पार्टियों के नेताओं पर ध्यान केंद्रित किया। इसी दौरान कई नेता उन्हीं के साथ आ गए, जो नहीं आ पाए वह भाजपा में शामिल हो गए। 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई, तो बंगाल में ममता के खिलाफ कई नेताओं के लिए भाजपा की सदस्यता एक जीवन पॉलिसी की तरह बन गई। इससे राज्य में भाजपा का कैडर लगातार मजबूत होता गया।"
गौरतलब है कि जवाहर सिरकार टीएमसी की तरफ से राज्यसभा पहुंचे थे। वहां पर उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ जबरदस्त मोर्चा खोले रखा। लेकिन 2024 में आरजीकर रेप केस के बाद सिरकार ने तीन मुख्य मु्द्दों के आधार पर इस्तीफा दिया। उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार, दादागिरी और आर जी कर रेप केस को राज्य सरकार द्वारा तरीके से संभाला गया उस पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया था। जवाहर सिरकार के इस्तीफे को लेकर उस वक्त ममता बनर्जी बैकफुट पर आ गई थीं।




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