2026 चल रहा, लेकिन विपक्ष ने 2025 लिख दिया, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि पूरी दुनिया को पता है कि 2026 चल रहा है, लेकिन अंदर 2025 लिख दिया। विपक्ष ने सोचा कि इससे स्पीकर रिजेक्ट कर देंगे। संकल्प ही नहीं संलग्न किया गया। जब ध्यान पर लाया गया तो नोटिस वापस लेकर दूसरी नोटिस दी।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विपक्षी सांसदों की उस गलती की तरफ इशारा किया, जिसमें अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस दिए जाने के समय साल 2026 की जगह कई जगह 2025 लिख दिया गया था। इसके बाद, उसे दोबारा ठीक करवाने के लिए कहा गया। अमित शाह ने कहा कि पूरी दुनिया को पता है कि 2026 चल रहा है, लेकिन अंदर 2025 लिख दिया। विपक्ष ने सोचा कि इससे स्पीकर रिजेक्ट कर देंगे। संकल्प ही नहीं संलग्न किया गया। इसकी वजह से उन्होंने सोचा कि रिजेक्ट हो जाएगा। जब ध्यान पर लाया गया तो नोटिस वापस लेकर दूसरी नोटिस दी। इसमें सिर्फ गौरव गोगोई के ही असली साइन थे, बाकी सब जेरोक्स थे। यह नियम के हिसाब से रिजेक्ट हो जाता। फोटोकॉपी नहीं चलती है, असली साइन वाली नोटिस देनी होती है। इतनी गंभीरता नहीं है विपक्ष के पास कि नियम के अनुसार लाया जाए।
अमित शाह ने कहा कि ये नियम पढ़ते ही नहीं है। कोई पार्टी के नियम से सदन नहीं चलेगा, इस लोकसभा के नियमों से ही सदन चलेगा। फिर भी स्पीकर के ऑफिस ने विपक्ष को मौका दिया कि इतनी गलतियां हैं, उसे सुधार लो। अब उन्हें शर्म आई और सुधार कर दायर कर दिया। हाई मोरल ग्राउंड यह है कि दो-दो बार नियम अनुसार प्रस्ताव न होने के बाद भी स्पीकर ने नोटिस सुधारने का मौका दिया। गंभीरता की बात करें तो जो चार दशक के बाद जो नियम का इस्तेमाल करके प्रस्ताव आया, वह नियम के हिसाब से ही नहीं था। ये नियम को मानते ही नहीं हैं और फिर कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते हैं। कुछ सदस्यों ने कहा कि माइक बंद हो जाता है। अभी गिरिराज सिंह भी पप्पू जी के खिलाफ बोल रहे थे, तब माइक बंद कर दिया गया था। यह सदन नियमों से चलता है और जो नियमों के हिसाब से नहीं चलेगा, उसका माइक बंद हो जाएगा और बंद हो ही जाना चाहिए।
गृह मंत्री ने आगे कहा, ''नोटिस दिया गया, अंतराल के बाद फिर से सदन शुरू हुआ। 9 मार्च को 14 दिन खत्म हो गए। वह प्रस्ताव विपक्ष का था, हम तो तैयारी करके आए थे। स्पीकर साहब चेयर पर ही नहीं बैठे। वे (विपक्ष) अपने प्रस्ताव के प्रति गंभीर ही नहीं हैं। वे उस पर चर्चा करने की जगह सदन को बिखेर देने का काम किया, इससे ज्यादा शर्मनाक घटना नहीं हो सकती। आप खुद के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं करना चाहते और फिर कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते। सबकी सहमति से नौ मार्च की तारीख तय की गई। सबको मालूम है कि बोलने के विषय बिजनेस एडवाइजरी कमेटी तय करती है। 80 फीसदी से ज्यादा भाषण स्पीकर पर नहीं थे, सरकार का विरोध करने पर थे। अरे भले आदमी, सरकार का विरोध करने के लिए ढेर सारे नियम हैं, आप सरकार का विरोध करने के लिए आज लोकतंत्र की गरिमा का प्रतीक स्पीकर पर सवाल उठा रहे। तीनों बार लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, तब डिप्टी स्पीकर ने इसे संचालित किया। कल कहा कि डिप्टी स्पीकर अप्वाइंट नहीं किया। अविश्वास प्रस्ताव बलराम जाखड़ के पास आए थे, तब डिप्टी स्पीकर थे, लेकिन तब कांग्रेस ने दोनों ही अपने पार्टी के रख दिए थे। आपको स्थान खाली है, यह मुद्दा उठाने का अधिकार नहीं है।''




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