Amid Vijayan Row Veteran Leader Manishankar Aiyer challenges Congress top Leadership party wins with dissent voices अब कांग्रेस आलाकमान से ही भिड़ गए मणिशंकर अय्यर, दे डाली राजीव वाली चुनौती; राहुल को भी लपेटा, India News in Hindi - Hindustan
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अब कांग्रेस आलाकमान से ही भिड़ गए मणिशंकर अय्यर, दे डाली राजीव वाली चुनौती; राहुल को भी लपेटा

अय्यर ने कहा कि पार्टी के इतिहास में केवल एक दौर ऐसा आया जब असहमति पर पूरी तरह रोक लगाई गई और वह दौर था इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का। उनके अनुसार उस समय असहमति दबाने के परिणाम बेहद गंभीर रहे थे।

Tue, 17 Feb 2026 10:09 PMPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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अब कांग्रेस आलाकमान से ही भिड़ गए मणिशंकर अय्यर, दे डाली राजीव वाली चुनौती; राहुल को भी लपेटा

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने मंगलवार को पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर इस पार्टी के कर्ताधर्ता असहमति के स्वर का सामना नहीं कर सकते तो यह मुख्य विपक्षी दल के लिए 'विनाशकारी है' और पार्टी को शासन करने का कोई अधिकार नहीं है। अय्यर ने कांग्रेस आलाकमान को यह चुनौती भी दी कि वह राहुल गांधी के मुंह से राजीव गांधी का 1989 में दिया वह बयान फिर से दिलवाएं कि ''सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है।''

अय्यर ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा उस वक्त खोला है जब उन्होंने बीते रविवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तारीफ की थी और उनके फिर से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई थी, जिसके बाद कांग्रेस ने उनकी टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर 23 मिनट 10 सेकेंड का एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने जवाहरलान नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय कांग्रेस में असहमति का सम्मान होने की बात कही।

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इंदिरा गांधी का दिया उदाहरण

उनका कहना है, ''जब इंदिरा गांधी असहमति के कारण पार्टी तोड़कर अलग हुईं और आपातकाल लगाया तो परिणाम क्या निकला? कांग्रेस न सिर्फ हारी, बल्कि इंदिरा रायबरेली से और संजय गांधी अमेठी से हार गए।'' अय्यर ने कहा कि जब आप कांग्रेस में विरोध को कुचलते हैं तो इसी तरह का परिणाम होता है। उनका कहना था कि कांग्रेस असहमति के स्वर के कारण है और कांग्रेस कई आवाजों के होने के कारण बढ़ती है।

राजीव गांधी असहमति जताने वालों को भी रखते थे साथ

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''जैसे कहा जाता है कि ईश्वर एक है और उस तक पहुंचने के रास्ते अलग अलग हैं, उसी तरह कांग्रेस एक है लेकिन कई रास्ते हैं जो कांग्रेस तक जाते हैं।'' उनका कहना है कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के मौजूदा कर्ताधर्ताओं द्वारा यह सबक भुला दिया गया है। उन्होंने राजीव गांधी के समय असहमति जताने वाले आरिफ मोहम्मद खान, वी पी सिंह और अरुण नेहरू का उल्लेख किया और कहा, ''जो ईमानदारी से असहमति रखते थे वो कांग्रेस के राजनीतिक दायरे में रहे, जिन्होंने बेईमानी से असहमति की, उन्हें इतिहास ने खुद, शायद अल्लाह ताला ने सजा दी।''

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कांग्रेस का मौजूदा तंत्र असहमति का सामना नहीं कर सकता

अय्यर ने कहा, ''यदि कांग्रेस का मौजूदा तंत्र असहमति का सामना नहीं कर सकता तो यह कांग्रेस के लिए विनाशकारी है। असहमति लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि असहमति का विनम्रता और स्पष्टता के साथ जवाब नहीं दे सकते तो हमें शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।'' उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 5 मई, 1989 को राजीव गांधी ने लोकसभा में कहा था, ''सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही बरकरार रह सकता है और यदि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है तो उसे कायम रहने का हकदार नहीं है।''

पिता, पुत्र और 'पवित्र आत्मा'

1929 के एक तीखे ऐतिहासिक किस्से का ज़िक्र करते हुए अय्यर ने कहा कि जब सुभाष चंद्र बोस ने मजाक में कहा था कि कांग्रेस को "पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा" चला रहे हैं, तब सुभाष चंद्र बोस ने जो कहा था, उसके लिए किसी ने उन्हें नहीं निकाला था। उन्होंने बताया कि कैसे बोस बाद में अहिंसा पर महात्मा गांधी के साथ बुनियादी असहमतियों के बाद कांग्रेस से बाहर चले गए, और फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया, लेकिन उन्हें कभी नहीं निकाला गया। अय्यर ने ज़ोर देकर कहा, “वह कांग्रेस से बाहर चले गए। उन्हें निकाला नहीं गया था।”

जवाहर लाल नेहरू और मोतीलाल नेहरू में थे गहरे मतभेद

अय्यर ने जवाहरलाल नेहरू और उनके पिता मोतीलाल नेहरू के बीच गहरे मतभेदों को भी याद किया, और कहा कि "आनंद भवन में डिनर करना नामुमकिन हो गया था क्योंकि पिता और पुत्र आपस में बहुत झगड़ रहे थे।" अय्यर ने कहा, "कांग्रेस पार्टी में नाराज़ लोगों से ऐसे ही निपटा जाता है।" अय्यर ने कहा, "कांग्रेस की असली ताकत अलग-अलग तरह के विचारों में रही है, जिन्हें कांग्रेस ने हमेशा जगह दी है।" अय्यर ने कहा,''कांग्रेस अलाकमान से कहना चाहता हूं कि आपमें यह हिम्मत है कि राजीव गांधी के ये शब्द उनके पुत्र के मुंह से कहलवाएं।'' उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें कार्य समिति से बाहर कर रखा है। उन्होंने 'राजीव गांधी अमर रहे' का नारा लगाकर अपनी बात खत्म की। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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