असम चुनाव हारते ही भिड़े विपक्षी दल, अखिल गोगोई का कांग्रेस पर तंज- गायब रहे राहुल-प्रियंका
असम विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद विपक्ष में कलह शुरू हो गई है। रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई ने कांग्रेस को दिशाहीन बताते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार से गायब रहने पर सवाल उठाए हैं।

असम विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के कुछ ही दिनों बाद विपक्षी गठबंधन में कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के सहयोगी और रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई ने हार का ठीकरा सीधे तौर पर कांग्रेस के सिर फोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के 'विजय रथ' को रोकने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास कोई ठोस रणनीति नहीं थी। गोगोई ने कांग्रेस के चुनाव प्रचार को 'बेतरतीब' और 'आधे-अधूरे मन से' किया गया प्रयास करार दिया।
असम की 126 विधानसभा सीटों में से एनडीए ने 102 सीटों पर बंपर जीत दर्ज की है। वहीं, विपक्षी गठबंधन की ओर से मैदान में उतरे केवल 21 उम्मीदवारों को ही जीत मिल सकी। इनमें से कांग्रेस ने 100 में से 19 सीटें जीती हैं, जबकि अखिल गोगोई के रायजोर दल ने 13 में से 2 सीटों पर कब्जा जमाया। अन्य सहयोगी दलों- असम जातीय परिषद, एएचपीएलसी और सीपीएम का खाता तक नहीं खुल सका। शिवसागर सीट से दोबारा चुनाव जीतने वाले अखिल गोगोई ने विपक्ष की विफलता के कारणों पर विस्तार से बात की है।
'गठबंधन की बैठकों में ही निकल गया सारा समय'
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गोगोई ने कहा, 'बीजेपी के पास एक बहुत ही बेहतरीन योजना थी, जबकि हमारी तरफ से आखिरी समय में बिना किसी योजना और आधे-अधूरे मन से प्रचार किया गया। हार का यही मुख्य कारण है।' उन्होंने कहा कि विपक्ष इसलिए रणनीति नहीं बना पाया क्योंकि उनका ज्यादातर समय गठबंधन को अंतिम रूप देने के लिए बैठकें करने में ही निकल गया। आपको बता दें कि चुनाव से सिर्फ 20 दिन पहले ही कांग्रेस और रायजोर दल के बीच गठबंधन पर मुहर लगी थी।
राहुल और प्रियंका गांधी के प्रचार पर उठाए सवाल
रायजोर दल के प्रमुख ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे बीजेपी के बड़े नेताओं ने कई बार असम का दौरा किया, लेकिन कांग्रेस के नेता प्रचार से गायब दिखे। गोगोई ने पूछा, 'कांग्रेस के नेता कितनी बार आए? राहुल गांधी सिर्फ दो दिन के लिए आए थे। इसी तरह प्रियंका गांधी भी केवल दो दिन के लिए ही आईं।' उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन के सहयोगियों ने एक साथ मिलकर चुनाव प्रचार नहीं किया।
'बीजेपी की रणनीति का विपक्ष के पास नहीं था कोई तोड़'
गोगोई के मुताबिक, बीजेपी सालों से एक बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही थी, जिसका विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने बीजेपी की जीत के ये कारण गिनाए:
परिसीमन: परिसीमन के जरिए मुस्लिम बहुल सीटों को घटाकर 22 कर दिया गया और बाकी को हिंदू सीटों में बदल दिया गया।
ध्रुवीकरण: बीजेपी लगातार 5 साल तक हिंदू-मुस्लिम करती रही। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के नाम पर 'मियां-मियां' और 'पाकिस्तान-पाकिस्तान' का मुद्दा उठाया।
विकास और राष्ट्रवाद: लाभार्थी योजनाएं, विकास की राजनीति, 'अति-राष्ट्रवाद' और मीडिया का सही इस्तेमाल भी बीजेपी की जीत का बड़ा कारण रहा। गोगोई ने कहा कि विपक्ष के पास इसका मुकाबला करने के लिए कोई रणनीति नहीं थी और कांग्रेस नेता विधानसभा में सिर्फ मुंह बंद करके बैठे रहे।
कांग्रेस नेताओं का तीखा पलटवार
अखिल गोगोई की इन तीखी टिप्पणियों के बाद कांग्रेस नेता भी चुप नहीं बैठे हैं। नाजिरा सीट से चुनाव हारने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने गोगोई पर निशाना साधते हुए कहा, 'अखिल गोगोई कांग्रेस की पीठ पर सवार होकर शिवसागर से जीते हैं। कुछ दिन पहले हुए पंचायत चुनाव में हमारा गठबंधन नहीं था, तब उनके कितने उम्मीदवार जीते थे? अब वह दावा कर रहे हैं कि सिर्फ उन्होंने ही काम किया है।'
दिसपुर सीट से हार का सामना करने वाली असम महिला कांग्रेस की अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी ने भी गोगोई को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, 'क्या आपने खुद गठबंधन नहीं तोड़ा? अगर कांग्रेस ने शिवसागर में अपना उम्मीदवार उतारा होता, तो ईवीएम भी आपको हारने से नहीं बचा पाती।'




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