SC के झटके के बाद ट्रंप ने फिर बढ़ाई टैरिफ, अब 15% किया; भारत पर कैसा असर
ट्रंप एक ओर अमेरिकी उद्योगों को बचाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ उनके व्यापारिक संबंध एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वहां की न्यायपालिका के बीच टकराव अब एक बड़े वैश्विक आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है। शनिवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि वह वैश्विक स्तर पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करेंगे। यह घोषणा शुक्रवार को लिए गए उनके पिछले फैसले के महज 24 घंटे बाद आई है।
ट्रंप का यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के विरोध में देखा जा रहा है, जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को असंवैधानिक करार दिया था।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अदालत के फैसले को हास्यास्पद, खराब तरीके से लिखा गया और असाधारण रूप से अमेरिका विरोधी बताया। उन्होंने उन जजों की भी तीखी आलोचना की जिन्होंने उनके खिलाफ फैसला सुनाया। वहीं, असहमति जताने वाले तीन जजों (ब्रेट कवाना, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो) की जमकर तारीफ की।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया कि 1977 का 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इस फैसले का मतलब यह था कि भारत सहित कई देशों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को वापस लेकर पहले की तरह लगभग 3.5% पर लाना होगा। हालांकि, ट्रंप ने शुक्रवार रात एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर कांग्रेस को दरकिनार करते हुए 10% शुल्क लगा दिया था, जिसे अब बढ़ाकर 15% कर दिया गया है।
भारत के लिए क्या बदल जाएगा?
भारत के लिए यह स्थिति अनिश्चितता और थोड़ी राहत के बीच झूल रही है। पिछले साल भारत को अमेरिका से 25% टैरिफ का सामना करना पड़ा था। रूस से तेल आयात करने के कारण इसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया था। फरवरी 2026 में राहत मिली। इसी महीने एक अंतरिम व्यापार समझौते के बाद ट्रंप ने भारत के लिए इन शुल्कों को घटाकर 18% करने की घोषणा की थी।
यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू होता, तो भारत पर शुल्क गिरकर 3.5% हो जाता। लेकिन ट्रंप के नए 15% वैश्विक टैरिफ के बाद भारत के लिए प्रभावी टैरिफ दर अब 18.5% के आसपास रहेगी। इसका मतलब है कि इस महीने की शुरुआत में तय हुई 18% की दर के मुकाबले भारत पर केवल 0.5% का मामूली अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
150 दिनों का अल्टीमेटम
ट्रंप द्वारा लगाए गए ये नए टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए वैध हैं। यदि इन्हें आगे बढ़ाना है तो ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी कांग्रेस से कानून पारित कराना होगा। वाइट हाउस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन देशों के साथ अमेरिका के व्यापार समझौते हैं उन्हें फिलहाल इस वैश्विक टैरिफ के दायरे में संतुलित रखने की कोशिश की जाएगी।




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