After the Chinese Robodog which Galgotias University Product has Sparked Controversy It turned out to be Korean चीनी रोबोट के बाद अब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के किस प्रोडक्ट पर हो गया विवाद, निकला कोरियाई, India News in Hindi - Hindustan
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चीनी रोबोट के बाद अब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के किस प्रोडक्ट पर हो गया विवाद, निकला कोरियाई

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने सॉकर ड्रोन को लेकर दावा किया कि यूनिवर्सिटी ने उसे शुरुआत से बनाया है। कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह, जो रोबोडॉग्स विवाद में भी शामिल थीं, का एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसके बाद वह निशाने पर आ गईं।

Wed, 18 Feb 2026 05:31 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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चीनी रोबोट के बाद अब गलगोटिया यूनिवर्सिटी के किस प्रोडक्ट पर हो गया विवाद, निकला कोरियाई

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में आ गई। चीनी रोबोट को अपना बताकर पेश करने से हुई किरकिरी के बाद एक और प्रोडक्ट पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस बार विवाद की जड़ ड्रोन सॉकर है, जिसे गलगोटिया ने अपना बता दिया, जबकि वह मेड इन साउथ कोरिया जैसा निकला। इससे पहले, यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ने चीन में निर्मित रोबोडॉग को अपना बताकर पेश किया था, जिससे काफी फजीहत हुई। चीनी मीडिया में भी इसको लेकर यूनिवर्सिटी को काफी ट्रोल किया गया। आनन-फानन में सरकार ने यूनिवर्सिटी को समिट का पवेलियन खाली करने का निर्देश दे दिया।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने सॉकर ड्रोन को लेकर दावा किया कि यूनिवर्सिटी ने उसे शुरुआत से बनाया है। कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह, जो रोबोडॉग्स विवाद में भी शामिल थीं, का एक वीडियो वायरल हो गया है। इसमें वह डीडी न्यूज के रिपोर्टर को सॉकर ड्रोन के बारे में बता रही हैं। वह बताती हैं कि यह बहुत इंट्रेस्टिंग सी चीज है, जिसका एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर इसका ऐप्लीकेशन सबकुछ यूनिवर्सिटी में हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि यह भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरिना है, जो गलगोटिया के ऑन कैंपस आपको देखने को मिलेगा। यहां पर बच्चे गेम खेलते हैं, फ्लाई करते हैं। नए तरीके से और मजबूती से फीचर्स के साथ डेवलप कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी जांच शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि यह प्रोडक्ट साउथ कोरिया के हेलसेल ग्रुप द्वारा बनाए गए सॉकर ड्रोन जैसा ही है। यह प्रोडक्ट भी चीनी रोबोट के जैसे ही कमर्शियली उपलब्ध भी है। एक वेबसाइट पर लगभग 40 हजार रुपये में मिल रहा है।

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गलगोटिया से खाली करवाया गया पवेलियन

रोबोट विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट में अपना पवेलियन खाली करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद वहां की लाइट भी काट दी गई, जिससे यूनिवर्सिटी को काफी जलील होना पड़ा। प्रोफेसर और स्टाफ को वहां से हटा दिया गया और जगह उनसे खाली करवा ली गई। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने विवाद के बाद कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई भी प्रदर्शक ऐसी वस्तुओं का प्रदर्शित करे जो उसकी अपनी न हों। यह विवाद तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय में संचार की प्रोफेसर नेहा सिंह ने मंगलवार को डीडी न्यूज को 'ओरियन' नामक एक 'रोबोटिक डॉग' को दिखाते हुए कहा था कि इसे '' गलगोटिया विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस द्वारा विकसित किया गया है।'' बाद में यह चीनी रोबोट निकला। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव कृष्णन ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह बर्दाश्त नहीं करेगी कि किसी दूसरे के बनाए उत्पाद को अपना मौलिक उत्पाद बताकर प्रदर्शित करे।

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