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किंगमेकर बनेंगे छोटे दल! आज तय होगा 'थलापति' विजय का भविष्य, किसके पास कितना दम?

तमिलनाडु चुनाव नतीजों के बाद थलापति विजय की पार्टी TVK को सरकार बनाने के लिए 5 और विधायकों की जरूरत है। जानिए कैसे छोटे दल (VCK, वामपंथी) बन गए हैं किंगमेकर और क्या विजय बन पाएंगे मुख्यमंत्री।

Fri, 8 May 2026 02:42 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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किंगमेकर बनेंगे छोटे दल! आज तय होगा 'थलापति' विजय का भविष्य, किसके पास कितना दम?

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता और सरगर्मी तेज हो गई है। अभिनेता से राजनेता बने जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन वे बहुमत के जादुई आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गए हैं। अब उन्हें छोटे दलों से भरोसे सरकार बनाने की उम्मीद है। इस बीच, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा विजय को सरकार बनाने का न्यौता न दिए जाने पर पूरे राज्य में टीवीके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है।

सबसे पहले- क्या है विधानसभा का गणित?

तमिलनाडु की 243 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 118 है।

विजय की पार्टी (TVK) ने इस चुनाव में 108 सीटें जीती हैं। हालांकि, पार्टी प्रमुख विजय ने दो सीटों (पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट) से चुनाव जीता है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, जिससे टीवीके का आंकड़ा घटकर 107 हो जाएगा।

अब तक केवल कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है। कांग्रेस के समर्थन के बाद यह संख्या 113 तक पहुंच जाती है, लेकिन फिर भी बहुमत साबित करने के लिए विजय को 5 और विधायकों की जरूरत है।

राज्यपाल का रुख और बढ़ता विवाद

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने दो दिनों के भीतर विजय के साथ दूसरी बैठक की। इस बैठक में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि टीवीके ने अब तक बहुमत का समर्थन स्थापित नहीं किया है। राज्यपाल के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत का होना अनिवार्य है, इसलिए पहले बहुमत के आंकड़े जुटाएं।

दूसरी ओर, विजय के समर्थकों और सहयोगी दलों का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए और उन्हें सदन पर अपना बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। पी. चिदंबरम और कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी कहा है कि विजय को मौका न देना अनुचित है।

कांग्रेस की राजभवन घेरने की चेतावनी

चेन्नई में कांग्रेस और टीवीके के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। मदुरै शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि तमिलनाडु के राज्यपाल भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। यदि उन्होंने कानून के अनुसार टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया, तो वे राजभवन का घेराव करेंगे। चेन्नई में राजभवन (लोक भवन) के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।

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छोटे दलों की भूमिका हुई अहम- किसके पास कितना दम?

चूंकि विजय को 5 और विधायकों की जरूरत है, ऐसे में छोटे दलों (VCK, CPI, CPM और IUML) की भूमिका किंगमेकर की हो गई है।

VCK (विदुथलाई चिरुथिगल काची): वीसीके ने आज अपने उच्च स्तरीय समिति की बैठक बुलाई है जिसमें टीवीके को समर्थन देने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पार्टी ने केवल 2 सीटें जीती थीं।

वामपंथी दल (CPI और CPM): इनका स्पष्ट मानना है कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए विजय को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए। वे वीसीके के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इन दोनों दलों ने दो-दो सीटें जीती हैं।

IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग): पार्टी का कहना है कि टीवीके ने उनसे संपर्क किया है, लेकिन क्योंकि वे द्रमुक (DMK) गठबंधन का हिस्सा हैं, इसलिए उनका कोई भी फैसला स्टालिन की रजामंदी पर निर्भर करेगा। IUML के पास भी 2 सीटे हैं।

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AIADMK और DMK से जुड़ी हलचलें

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा जोरों पर है कि क्या चिर-प्रतिद्वंद्वी DMK और AIADMK आपस में हाथ मिला सकते हैं। हालांकि, DMK के प्रवक्ताओं ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा है कि अब तक ऐसा कोई विचार नहीं है। इस बीच, AIADMK (जिसने 47 सीटें जीती हैं) के भीतर भी दरार की खबरें आ रही हैं। पुडुचेरी में AIADMK के लगभग 28 विधायक कैंप कर रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर टूट या किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की आशंका जताई जा रही है।

तमिलनाडु की राजनीति इस वक्त एक बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण मोड़ पर है। टीवीके के नवनिर्वाचित विधायकों को पार्टी आलाकमान की ओर से धैर्य रखने को कहा गया है, क्योंकि विजय सरकार बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। आज का दिन बेहद अहम है क्योंकि छोटे दलों के फैसले यह तय करेंगे कि विजय मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाते हैं या तमिलनाडु किसी और बड़े सियासी उलटफेर का गवाह बनेगा।