'राघव चड्ढा ने पीठ में छुरा घोंपा', AAP ने ED रेड को पंजाब चुनाव से जोड़ा; BJP का पलटवार
आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच विवाद गहरा गया है। AAP नेताओं ने चड्ढा पर धोखे का आरोप लगाया है और सांसद अशोक मित्तल पर हुई ED की छापेमारी को इसी अंदरूनी कलह और BJP की साजिश से जोड़ा है। पढ़ें पूरी खबर।

आम आदमी पार्टी (AAP) और उनके राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच दूरियां अब एक बड़े विवाद में बदल गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चड्ढा पर 'धोखाधड़ी' का आरोप लगाया है और हाल ही में AAP सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापों को इसी अंदरूनी कलह का नतीजा बताया है। यह मामला तब और गरमा गया जब ऐसी खबरें आईं कि केंद्र सरकार ने राघव चड्ढा को 'Z' श्रेणी की सुरक्षा दी है, जिसे AAP नेता राजनीतिक मिलीभगत बता रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज के गंभीर आरोप
AAP विधायक सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर उन्होंने आरोप लगाया कि यह केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा कवर का एक सोचा-समझा खेल है। भारद्वाज ने कहा कि ED ने राघव चड्ढा को डराया, जिसके बाद डर या लालच में आकर उन्होंने अपनी ही पार्टी की पीठ में छुरा घोंप दिया। AAP ने राज्यसभा में उपनेता के पद से चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को नियुक्त किया था। भारद्वाज का दावा है कि अब ED राघव चड्ढा के बजाय अशोक मित्तल के घर और व्यापारिक ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। सूत्रों का हवाला देते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि अशोक मित्तल पर हुई ED की छापेमारी के पीछे राघव चड्ढा का ही हाथ है।
अशोक मित्तल पर ED की छापेमारी
ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत AAP के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल से जुड़े ठिकानों पर पंजाब और हरियाणा में तलाशी ली। जालंधर और गुरुग्राम में करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिनमें 'लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी' (LPU) और उससे जुड़े शिक्षण संस्थान शामिल हैं। मित्तल इसी यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं। AAP नेताओं ने इस कार्रवाई को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने वाली राजनीति से प्रेरित कदम बताया है।
AAP नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र पर चुनाव से पहले राजनीतिक दमन का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और BJP को करारा जवाब देगी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इन छापों की निंदा की और इसे चुनाव जीतने की रणनीति का हिस्सा बताया। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता कम हो रही है, इसलिए वे चुनाव जीतने के लिए ED और CBI का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को संसद के सत्र में उठाने की बात कही है। मनीष सिसोदिया और अनुराग ढांडा ने भी आरोप लगाया कि BJP केंद्रीय एजेंसियों के बिना चुनाव नहीं लड़ सकती।
BJP का पलटवार
इन आरोपों के जवाब में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने AAP पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने AAP को "चोरों और लुटेरों की पार्टी" करार दिया। बिट्टू ने कहा कि 'स्वच्छ भारत' नीति के तहत देश से भ्रष्टाचार की गंदगी को साफ किया जा रहा है और इसी के तहत जांच एजेंसियां भ्रष्ट सांसदों को पकड़ रही हैं।
विवाद और राघव चड्ढा का पक्ष
इस पूरे विवाद की जड़ राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया जाना है। कभी अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी और 2022 में पंजाब जीत के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले चड्ढा, पिछले कुछ महीनों से पार्टी नेतृत्व के निशाने पर हैं। नेताओं का आरोप है कि चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे हैं, अपनी छवि चमकाने ('सॉफ्ट PR') में लगे हैं और संसद में केंद्र सरकार पर हमलावर होने से बच रहे हैं। महत्वपूर्ण राजनीतिक मौकों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी वे नदारद रहे हैं।
राघव चड्ढा ने इन सभी आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उनकी 'चुप्पी को उनकी कमजोरी न समझा जाए' और उन्होंने पार्टी को अपने दावों के लिए सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी है। पंजाब में आगामी चुनावों से पहले, आम आदमी पार्टी एक साथ दो मोर्चों पर जूझ रही है- पहला, अपनी ही पार्टी के भीतर की बगावत और दूसरा, केंद्रीय एजेंसियों की सख्त कार्रवाई।




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