Aakhiri mauka de rahe hain hamare aadesh ka palan nahin kiya to Why CJI Suryakant warns Centre आखिरी मौका दे रहे हैं, अगर हमारे आदेश का पालन नहीं किया तो... CJI सूर्यकांत ने केंद्र को क्यों चेताया?, India News in Hindi - Hindustan
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आखिरी मौका दे रहे हैं, अगर हमारे आदेश का पालन नहीं किया तो... CJI सूर्यकांत ने केंद्र को क्यों चेताया?

CJI Suryakant warns Centre:  सीजेआई ने कहा कि वह केंद्र को आखिरी मौका दे रहे हैं। इसके बावजूद अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो पीठ अंतिम सुनवाई करेगी। CJI ने यह भी कहा कि इस याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध किया जाएगा।

Fri, 24 April 2026 10:56 PMPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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आखिरी मौका दे रहे हैं, अगर हमारे आदेश का पालन नहीं किया तो... CJI सूर्यकांत ने केंद्र को क्यों चेताया?

CJI Suryakant warns Centre : देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बांग्लादेश प्रत्यर्पित किए गये कुछ लोगों को वापस लाने संबंधी एक याचिका पर रुख स्पष्ट करने के लिए शुक्रवार को केंद्र सरकार को अंतिम मौका देते हुए आगाह किया कि अगर सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया तो पीठ अंतिम सुनवाई करेगी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश वकील से इस मुद्दे पर निर्देश लेकर शीर्ष अदालत को अवगत कराने को कहा।

दरअसल, भोदू शेख की गर्भवती बेटी को बांग्लादेश भेज दिया गया था। शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि इस मामले में केंद्र का अदालत को अपने विचारों से अवगत न कराना ''कुछ हद तक अनुचित'' है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह केंद्र को आखिरी मौका दे रहे हैं। इसके बावजूद अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो पीठ अंतिम सुनवाई करेगी। CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि इस याचिका को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

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मानवीय आधार पर गर्भवती को भारत प्रवेश की अनुमति दी थी

शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष तीन दिसंबर को "मानवीय आधार" पर एक गर्भवती महिला और उसके आठ वर्षीय बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी। उन्हें कुछ महीने पहले बांग्लादेश भेज दिया गया था। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को नाबालिग की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती महिला सुनाली खातून को प्रसव सहित सभी आवश्यक चिकित्सा सहायता निःशुल्क उपलब्ध कराने को कहा था।

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HC ने केंद्र के फैसले को अवैध करार दिया था

न्यायालय ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील को भी दर्ज किया कि सक्षम प्राधिकारी ने केवल मानवीय आधार पर महिला और उसके बच्चे को देश में प्रवेश की अनुमति देने पर सहमति जताई है और उन्हें निगरानी में रखा जाएगा। शीर्ष अदालत केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 26 सितंबर 2025 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। उस आदेश में सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश भेजने के केंद्र सरकार के फैसले को "अवैध" करार देते हुए रद्द कर दिया गया था।