22 Indian ships preparing to leave the Strait of Hormuz amid the war relief from the LPG crisis युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की तैयारी में भारत के 22 जहाज, LPG संकट से मिलेगी राहत?, India News in Hindi - Hindustan
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युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की तैयारी में भारत के 22 जहाज, LPG संकट से मिलेगी राहत?

ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट में फंसे भारत के जहाजों को निकालने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी बीच मुंबई डायरेक्टरी की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने ऐसे 22 जहाजों की पहचान कर ली है, जिन्हें रास्ता साफ होते ही सबसे पहले निकाला जाएगा।

Fri, 13 March 2026 05:41 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की तैयारी में भारत के 22 जहाज, LPG संकट से मिलेगी राहत?

पश्चिम एशिया में जारी जंग ने वैश्विक ऊर्जा संकट को बढ़ा दिया है। भारत समेत तमाम देश अब इस रास्ते से अपने जहाजों को निकालने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसी बीच मुंबई स्थित डायरेक्टरेट ऑफ शिपिंग की तरफ से बताया गया कि 22 जहाजों की पहचान कर ली गई है, जिनमें रास्ता साफ होते ही सबसे पहले वहां से निकाल लिया जाएगा। डायरेक्ट्रेट की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सरकारी सूत्रों द्वारा बताया गया कि भारत,ईरान के साथ अपने 30 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकाले जाने को लेकर बातचीत कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय पर खाड़ी क्षेत्र में कुल 28 जहाज फंसे हुए हैं, इनमें से 24 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में हैं, जबकि 4 जहाज होर्मुज और ओमान की खाड़ी के पूर्व के आसपास के जल क्षेत्र में फंसे हैं।

इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। इसकी वजह से भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बन गई थी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा लगातार इस क्षेत्र में काम किया जा रहा है और जहाजों को सुरक्षित भारत लाने के लिए नेवल एस्कॉर्ट जैसे सुरक्षा उपायों की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

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एलपीजी संकट से मिलेगी राहत?

रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन 22 जहाजों की पहचान की गई है, उनमें से 13 जहाज भारतीय झंड़ा वाले हैं, जबकि बाकी अन्य देशों के हैं। इन सभी जहाजों को भारत आना था। इन जहाजों में से 3 पर एलएनजी, 11 पर एलपीजी और 8 पर कच्चा तेल लदा हुआ है। अनुमान के मुताबिक जहाजों के कार्गो में एलएनजी करीब 2,15,000 मीट्रिक टन, एलपीजी करीब- 4,15,000 मीट्रिक टन और कच्चा तेल करीब 17,50,000 मीट्रिक टन मौजूद है। इसके अलावा तीन और भारतीय झंड़ा वाले कंटेनर जहाजों की भी पहचान की गई है, ताकि उन्हें सुरक्षित रूप से होर्मुज से बाहर निकाला जा सके। इस रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने 12 मार्च तक इस युद्ध क्षेत्र में फंसे 215 नाविकों को निकाल लिया है।

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गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पेजशिकयान के बीच फोन पर बातचीत हुई है। युद्ध के शुरू होने के बाद विदेश मंत्री जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अराघची के बीच लगातार बातचीत होती रही है, लेकिन राष्ट्राध्यक्षों के बीच यह पहली बातचीत थी। इस युद्ध के शुरू होने के बाद भारत के जहाज वहां पर फंसे हुए हैं। हालांकि, एक लाइबेरिया का झंड़ा लगा एक जहाज यहां से भारत आ चुका है। मुंबई में उतरे इस जहाज पर कच्चा तेल भरा हुआ था। एक और थाईलैंड का झंड़ा लगा जहाज, जो यूएई से गैस लेकर भारत के गुजरात तट की तरफ आ रहा था, उस पर हमला हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। इसके बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष के साथ बातचीत की थी।

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