Why Did Khamenei Not Go to the Bunker Iran Supreme Leader Aide Explains India Also Discussed खामेनेई बंकर में क्यों नहीं गए? ईरान के सुप्रीम लीडर के सहयोगी ने बताया, भारत की भी चर्चा, Middle-east Hindi News - Hindustan
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खामेनेई बंकर में क्यों नहीं गए? ईरान के सुप्रीम लीडर के सहयोगी ने बताया, भारत की भी चर्चा

इलाही के अनुसार, खामेनेई अक्सर कहते थे कि वे किसी अस्पताल के बिस्तर या बीमारी से मरने के बजाय शहीद होना पसंद करेंगे। उनकी यह इच्छा रमजान के पवित्र महीने के दौरान पूरी हुई, जिसे उनके अनुयायी एक सर्वोच्च सम्मान मान रहे हैं।

Sun, 15 March 2026 05:44 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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खामेनेई बंकर में क्यों नहीं गए? ईरान के सुप्रीम लीडर के सहयोगी ने बताया, भारत की भी चर्चा

Iran War Updates: मिडिल ईस्ट में जारी अघोषित युद्ध के बीच ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत और उनके अंतिम दिनों के साहसी फैसलों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। जहां एक ओर तेहरान में सत्ता का केंद्र रहे खामेनेई ने खुद की सुरक्षा के बजाय जनता के साथ खड़े होने को प्राथमिकता दी, वहीं दूसरी ओर भारत ने इस भीषण युद्ध के बीच अपने हितों को सुरक्षित रखने में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है।

नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव' में दिवंगत खामेनेई के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने उनके अंतिम समय के बेहद भावुक और चौंकाने वाली कहानी बताई। इलाही ने बताया कि 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में शहीद होने से पहले खामेनेई ने सुरक्षित बंकर में जाने से साफ इनकार कर दिया था।

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जब सुरक्षा टीम ने उनसे किसी गुप्त सुरक्षित स्थान पर जाने का अनुरोध किया तो 86 साल के खामेनेई ने जवाब दिया, "यदि आप ईरान के 9 करोड़ नागरिकों के लिए सुरक्षित आश्रय प्रदान कर सकते हैं, तो ही मैं अपना घर छोड़ने को तैयार हूं।" यहां तक कि उन्होंने अपने घर के नीचे बंकर बनवाने से भी मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह एक खास जीवन नहीं जीना चाहते और खुद को गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों के बराबर रखना चाहते हैं।

शहादत की कामना

इलाही के अनुसार, खामेनेई अक्सर कहते थे कि वे किसी अस्पताल के बिस्तर या बीमारी से मरने के बजाय शहीद होना पसंद करेंगे। उनकी यह इच्छा रमजान के पवित्र महीने के दौरान पूरी हुई, जिसे उनके अनुयायी एक सर्वोच्च सम्मान मान रहे हैं।

होर्मुज से 'तिरंगे' को मिली हरी झंडी

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच नई दिल्ली के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई सफल वार्ता के बाद ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय के बाद भारतीय टैंकर 'पुष्पक' और 'परिमल' इस रणनीतिक जलमार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं। सऊदी अरब का तेल लेकर आ रहा एक अन्य टैंकर भी भारतीय कप्तान के नेतृत्व में मुंबई तट पर सुरक्षित पहुंच गया है। यह राहत ऐसे समय में मिली है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल के जहाजों पर ईरान ने सख्त पाबंदी लगा रखी है और उन पर हमले जारी हैं।

होर्मुज: दुनिया की नब्ज और ईरान का शिकंजा

युद्ध के 12वें दिन भी होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है। यह 55 किलोमीटर चौड़ा जलमार्ग दुनिया के 31% तेल शिपमेंट का रास्ता है। IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) ने साफ किया है कि उनकी अनुमति के बिना गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास चीनी तकनीक पर आधारित एंटी-शिप मिसाइलों का जाल है, जो इस पूरे समुद्री रास्ते को बंद करने की क्षमता रखता है।

सऊदी अरब और यूएई पर हमले

ईरान ने सऊदी के तेल क्षेत्रों और दुबई एयरपोर्ट की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागीं। सऊदी ने दावा किया है कि उसने 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया है। इजरायली सेना ने लेबनान की बेका घाटी में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई है।

नए सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर सस्पेंस बरकरार है। रिपोर्ट्स के अनुसार वे अमेरिकी हमलों में घायल हुए थे, हालांकि ईरानी अधिकारी उन्हें सुरक्षित बता रहे हैं।

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