अकेले ही दम पर होर्मुज खोलने की तैयारी में अमेरिका! ईरान पर गिराया 5000 पाउंड का 'महाबम'
मध्य पूर्व में महायुद्ध: अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 5000 पाउंड के बम गिराकर तबाह किया। वहीं ईरान के मिसाइल व ड्रोन हमलों से इजरायल, UAE, और कुवैत में भारी दहशत है। इस संघर्ष की पूरी खबर पढ़ें।

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान की तटरेखा पर स्थित मजबूत मिसाइल ठिकानों को तबाह कर दिया है। अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने 5000 पाउंड (2267 किलोग्राम) के गहराई तक मार करने वाले बमों का इस्तेमाल किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 'X' पर जानकारी दी कि इन ठिकानों पर मौजूद ईरानी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा था, जिसे खत्म करने के लिए यह सफल कार्रवाई की गई।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इस बात पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी कि नाटो और उनके अन्य प्रमुख सहयोगियों ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को सुरक्षित करने में मदद की उनकी अपील को ठुकरा दिया है। ट्रंप ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध को दुनिया की भलाई के लिए आवश्यक बता रहे हैं, भले ही दूसरे देश उनके इस कदम की सराहना न करें।
सहयोगियों की बेरुखी से ट्रंप नाराज
ईरान के साथ अमेरिका का यह युद्ध अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि यूरोपीय देश कुछ 'माइंसवीपर' (सुरक्षा पोत) भेजेंगे क्योंकि इसमें ज्यादा खर्च नहीं आता, लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया।
एहसान फरामोशी का आरोप
ट्रंप ने शिकायत की कि यूक्रेन युद्ध के दौरान नाटो देशों ने अमेरिका से अरबों डॉलर की मदद ली, लेकिन अब वे अमेरिका और इजरायल की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। वाइट हाउस में सेंट पैट्रिक डे के अवसर पर आयरलैंड के प्रधानमंत्री मिहॉल मार्टिन की मेजबानी करते हुए ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "हमें वास्तव में किसी की मदद की जरूरत नहीं है।" यह युद्ध पूरी तरह से ट्रंप के फैसलों पर निर्भर हो गया है।
नाटो और यूरोपीय संघ (EU) ने किया किनारा
दुनिया भर का लगभग 20% कच्चा तेल इसी जलमार्ग से गुजरता है। इसके बावजूद जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने ट्रंप की मांगों को खारिज करते हुए कहा- यह यूरोप का युद्ध नहीं है। हमने यह युद्ध शुरू नहीं किया और इसके लिए हमसे कोई सलाह भी नहीं ली गई। हम नहीं जानते कि इस युद्ध के उद्देश्य क्या हैं और सदस्य देश इसमें घसीटे जाना नहीं चाहते।
नाटो की स्थिति
नाटो ने स्पष्ट किया है कि वह एक रक्षात्मक गठबंधन है, आक्रामक नहीं। इसलिए उनकी अमेरिका के नेतृत्व वाले इस युद्ध में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। सहयोगियों के इस रुख को ट्रंप ने नाटो के लिए एक बहुत बड़ी गलती और एक बड़ा परीक्षण करार दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे नाटो से अमेरिका को बाहर निकालने पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से सोचने वाली बात है। मुझे इस फैसले के लिए संसद (Congress) की जरूरत नहीं है।
वैसे बता दें कि विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अकेले यह फैसला नहीं ले सकते, क्योंकि 2023 में पारित एक अमेरिकी कानून के तहत नाटो छोड़ने के लिए संसदीय मंजूरी अनिवार्य है।
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